धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मार्च माह में प्रदेश स्तरीय आंदोलन करते हुए विधानसभा घेराव किया जाएगा।
हड़ताल से आंगनबाड़ी केंद्र प्रभावित
हड़ताल के चलते जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटका रहा, जिससे महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन पर असर पड़ा है। पोषण अभियान, टीकाकरण सहयोग, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की देखरेख तथा सर्वे जैसे कार्य प्रभावित हुए हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का निष्ठापूर्वक क्रियान्वयन कर रही हैं, बावजूद इसके उन्हें अब तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उनका आरोप है कि नियमित कर्मचारियों की तरह जिम्मेदारियां निभाने के बाद भी उन्हें न तो वेतनमान का लाभ मिलता है और न ही अन्य शासकीय सुविधाएं।

शासकीय कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन की मांग
हड़ताल की मुख्य मांग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस प्रकार शिक्षा कर्मियों और पंचायत कर्मियों को नीति बनाकर नियमित किया गया, उसी प्रकार उन्हें भी नियमित किया जाए।
जब तक शासकीय कर्मचारी घोषित नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही मध्यप्रदेश की तर्ज पर सभी सुविधाएं लागू करने, प्रतिवर्ष ₹1000 मानदेय वृद्धि का एग्रीमेंट करने, सामाजिक सुरक्षा के तहत मासिक पेंशन, बीमा, सेवानिवृत्ति लाभ, मृत्यु पर एकमुश्त सहायता राशि एवं ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
“मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा व्यापक”
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
धरना प्रदर्शन में प्रदेश भारतीय महासंघ की महामंत्री माधुरी रथ, जिलाध्यक्ष बिटा साहू, डामिन ज्योति, आयशा खान, कल्याणी साहू, संतोषी मंडावी, आशा गोस्वामी, सुनीता, कमला चंद्राकर, प्रभा देवी, अनीता मेश्राम सहित जिलेभर की बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल रहीं।




















