
सत्र में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), एमएसएमई मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय और औषध विभाग के नीति निर्माताओं के साथ उद्योग जगत और शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस दौरान MeitY और इंडिया एआई मिशन के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्मार्ट गवर्नेंस (NISG) और एथेना इंफोनॉमिक्स द्वारा तैयार एक अहम अध्ययन का शुभारंभ किया गया।
यह अध्ययन वस्त्र, फार्मास्युटिकल्स (चिकित्सा उपकरण सहित) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के एमएसएमई में एआई अपनाने के लिए एक व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करेगा। खास बात यह है कि यह केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि 350 से अधिक विनिर्माण इकाइयों के शॉप फ्लोर से लेकर प्रबंधन स्तर तक के अनुभवों पर आधारित ठोस रणनीति प्रस्तुत करेगा।

सत्र में स्पष्ट संदेश दिया गया कि एआई केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि उत्पादकता, दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का बड़ा अवसर है। इंडिया एआई मिशन का लक्ष्य है कि एआई का लाभ सीधे अर्थव्यवस्था के वास्तविक क्षेत्रों, खासकर विनिर्माण एमएसएमई तक पहुंचे।
एमएसएमई क्षेत्र पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और कुल निर्यात में 48.6 प्रतिशत है। ऐसे में यदि एआई को उत्पादन स्तर (शॉप फ्लोर) तक उतारा जाता है तो यह सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता को कई गुना बढ़ा सकता है।

चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत को 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में विनिर्माण क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका होगी। एआई लागत कम करने, गुणवत्ता सुधारने और बाजार विस्तार में मदद कर सकता है। विशेषकर औषध क्षेत्र में, जहां 80 प्रतिशत से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ एमएसएमई हैं, वहां एआई परिवर्तनकारी साबित हो सकता है।
वस्त्र और पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया। यह स्पष्ट हुआ कि भारत का असली “एआई डिविडेंड” कारखानों में दिखाई देगा—जहां मशीनों, डेटा और कौशल का संगम नई आर्थिक ऊर्जा पैदा करेगा।

समिट ने यह संकेत दे दिया है कि भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में एआई एक निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। नीति, तकनीक और उद्योग के इस संगम से एक नया औद्योगिक अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है।
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