
आयोजन स्थल को आकर्षक मंच, विद्युत सज्जा और सुदृढ़ ध्वनि व्यवस्था से सुसज्जित किया गया था। श्रद्धालुओं के बैठने की व्यापक व्यवस्था के बीच पूरे दिन शिवभक्ति की धारा बहती रही। शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का मनोहारी वर्णन और माँ गंगा आरती की तर्ज पर भव्य माँ नर्मदा आरती ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर आरती में शामिल हुए।

विद्वान आचार्यों ने वेदमंत्रोच्चार और शास्त्रोक्त विधि से रुद्राभिषेक संपन्न कराया। प्रमुख आचार्य पं. हितेश तिवारी की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने युवाओं से माता-पिता की परिक्रमा कर प्रणाम करने की परंपरा अपनाने और समाज में धार्मिक चेतना बनाए रखने का संदेश दिया।

आयोजन की एक विशेष पहल के तहत लगभग 7500 परिवारों को निःशुल्क रुद्राक्ष वितरित किए गए। सायंकालीन प्रसाद (भंडारा) में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। यजमानों को पूजा सामग्री लाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि समस्त व्यवस्था आयोजन समिति द्वारा की गई थी।
संस्था के संचालक भरत देवांगन ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है। कार्यक्रम के सफल संचालन में आईसेक्ट कंप्यूटर देवरी के स्टाफ और छात्र-छात्राओं का उल्लेखनीय सहयोग रहा।

नर्मदा धाम को अंचल में पवित्र तीर्थ के रूप में मान्यता प्राप्त है। विद्वानों के अनुसार ऐसे तीर्थ स्थल पर सामूहिक रुद्राभिषेक का पुण्य हजारों यज्ञों के समान माना जाता है। इस अवसर पर बालोद, राजनांदगांव, खैरागढ़, रायपुर, डोंगरगांव और धमतरी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि यजमान के रूप में शामिल हुए। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर नर्मदा धाम सुरसुली श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का जीवंत केंद्र बन गया।




















