
छात्रों के अनुसार इन लगातार हो रही चोरियों के पीछे सबसे बड़ा कारण कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का दो वर्षों से बंद होना है। कॉलेज में लगभग 32 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके लिए दो अलग-अलग डीवीआर सिस्टम भी स्थापित किए गए थे, लेकिन वर्तमान में ये डीवीआर सिस्टम हटे हुए हैं और पूरी निगरानी व्यवस्था ठप पड़ी है। ऐसे में परिसर की “तीसरी आंख” पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है।
मामले को लेकर छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रबंधन को लिखित शिकायत भी सौंपी है। एलएलबी के छात्र और छात्र नेता देवेंद्र साहू ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार सीसीटीवी कैमरों को चालू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कॉलेज के ठीक सामने बालोद शहर का सिटी कोतवाली स्थित है, इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में चोरी की घटनाएं होना सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।
इस संबंध में कॉलेज के प्राचार्य जे.के. खलखो ने कहा कि छात्रों को मोबाइल फोन न लाने के लिए लगातार समझाइश दी जाती है। हालांकि, सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि कॉलेज के पास इसके लिए अलग से कोई फंड उपलब्ध नहीं होता। इस विषय पर जनभागीदारी समिति की बैठक में निर्णय लिया जाता है और आगामी बैठक के बाद इस पर फैसला लेकर कैमरों को पुनः चालू कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हालांकि, वर्तमान समय में लगभग सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र मोबाइल लेकर आते हैं। ऐसे में परीक्षा या कक्षाओं के दौरान मोबाइल सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संस्थान की भी बनती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी व्यवस्था आज एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है।

छात्रों का आरोप है कि प्रबंधन की ओर से अब तक प्रभावी कदम न उठाया जाना लापरवाही को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि जिला मुख्यालय का यह लीड कॉलेज छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बंद पड़ी निगरानी व्यवस्था को कब तक सुचारु करता है।
फिलहाल, लगातार हो रही चोरियों ने कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।




















