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‘विकसित भारत जी-राम-जी 2025’ से बदलेगी गाँवों की तक़दीर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताक़त : रंजना साहू

बालोद।विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम 2025 गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने वाला साबित होगा। यह बातें पूर्व विधायक धमतरी एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू ने गुरुवार को जुंगेरा स्थित जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की संसद द्वारा पारित रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) जी रामजी 2025’ ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी अधिनियम है। यह केवल रोज़गार देने की योजना नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने हेतु विकसित गाँवों की ठोस रूपरेखा है। यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने, किसानों-मज़दूरों की आय बढ़ाने और गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। श्रीमती साहू ने कहा कि दुर्भाग्यवश कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दल इस ऐतिहासिक अधिनियम को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में हम सभी का नैतिक दायित्व है कि मज़दूरों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाले इस अधिनियम के सही तथ्य, सही भावना और सही उद्देश्य को जन-जन तक पहुँचाया जाए।

मज़दूरी भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति राशि देने का प्रावधान

प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू ने कहा कि अब तक मनरेगा के तहत 100 दिन के रोज़गार की गारंटी थी, लेकिन जी रामजी 2025 के माध्यम से इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी ग्रामीण परिवारों के लिए आय की स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इसके साथ ही, यदि तय समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोज़गारी भत्ता देने के प्रावधान को और सशक्त बनाया गया है। मज़दूरी भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति राशि का प्रावधान भी किया गया है, जिससे मज़दूरों का सम्मान और अधिकार सुरक्षित रहें।

गाँव खुद तय करेगा अपना विकास

प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि योजनाएँ केंद्र से थोप दी जाती हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। इस अधिनियम की आत्मा विकेंद्रीकरण है। ग्राम सभा और ग्राम पंचायत ही अपने गाँव के विकास की योजना बनाएँगी। कौन-से कार्य होने चाहिए, किन जरूरतों को प्राथमिकता मिले—यह निर्णय गाँव खुद करेगा। मज़दूरों का पंजीकरण, जॉब कार्ड जारी करना, काम के आवेदन लेना और योजनाओं का क्रियान्वयन—इन सभी की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। अधिनियम के अंतर्गत कम से कम 50% कार्य सीधे ग्राम पंचायतों द्वारा कराए जाना अनिवार्य किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार और गाँव को आवश्यकता-आधारित विकास मिलेगा।टिकाऊ ढाँचा, मजबूत अर्थव्यवस्थाइस योजना के अंतर्गत संरचनात्मक निर्माण,आजीविका-आधारित कार्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम, स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, सड़क, नाली, शेड जैसे आवश्यक ढाँचों के साथ-साथ रिटेनिंग वॉल, पिचिंग और ड्रेनेज जैसी संरचनाएँ बनाई जाएँगी। इससे जल-सुरक्षा बढ़ेगी, बुनियादी ढाँचा मज़बूत होगा, रोज़गार और आमदनी में वृद्धि होगी और गाँव प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित बनेंगे।

गाँवों में स्किल सेंटर, शेड निर्माण और हाट जैसे कार्य होंगे

उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनों के लिए इस अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। गाँवों में स्किल सेंटर, शेड निर्माण और हाट जैसे कार्य होंगे, जिससे बहनों को गाँव में ही आजीविका के अवसर मिलें। यह कदम महिला सशक्तिकरण को नई ऊँचाई देगा और ग्रामीण परिवारों की आय को बहुआयामी बनाएगा।खेती और रोज़गार में संतुलन खेती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि 125 दिन की रोज़गार गारंटी बनी रहे, लेकिन बुवाई और कटाई के समय जब खेतों में मज़दूरों की अधिक आवश्यकता होती है, तब राज्य सरकार को अधिकार दिया गया है कि वर्ष में अधिकतम 60 दिनों तक योजना के कार्यों को अधिसूचित कर सके। इससे कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे, किसानों को समय पर मज़दूर मिलेंगे और गाँव की अर्थव्यवस्था संतुलित बनी रहेगी। प्रेसवार्ता में संध्या परगनिया ,इन्द्रजीत खालसा,जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख ,राकेश यादव, वीरेन्द्र साहू अभिषेक शुक्ला, तोमन साहू, राकेश छोटू यादव जितेन्द्र साहू ,विनोद जैन,कमल पनपालिया उपस्थित रहे।

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