विद्यालय परिवार द्वारा मुख्य अतिथि का पारंपरिक स्वागत गुलाल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों और राउत नाचा की सजीव प्रस्तुति देकर अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात सरस्वती माता, भारत माता एवं आध्यात्मिक प्रतीक ‘ॐ’ के तैलचित्र पर पुष्पमाल्य अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया गया। शिशु मंदिर की शिक्षिकाओं द्वारा सरस्वती वंदना के सुमधुर गायन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

मुख्य अतिथि प्रतिभा संतोष चौधरी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृ शक्ति केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है। हर सफल व्यक्ति के पीछे महिला का योगदान होता है। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास में मां की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों का मोबाइल और टेलीविजन की ओर अत्यधिक झुकाव चिंताजनक है। बच्चों को देशभक्ति और नैतिक मूल्यों से युक्त कहानियां सुनाना आवश्यक है, क्योंकि केवल भौतिक सुविधाएं देने से उज्ज्वल भविष्य का निर्माण नहीं होता।
उन्होंने कहा कि मां बच्चों की प्रथम गुरु और परिवार पहली पाठशाला है। संस्कारित मां ही बच्चों को महान बनाती है। विवेकानंद, राम और कृष्ण जैसे महापुरुषों के निर्माण में भी उनकी माताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मातृ शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
कार्यक्रम में दमयंती हरदेल (सभापति, जनपद पंचायत), लता चुरेंद्र (सरपंच, ग्राम जगन्नाथपुर), सुनीता मनहर (पार्षद), सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्य, ग्राम की समस्त मातृशक्ति, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
समारोह ने मातृ शक्ति के सम्मान, सांस्कृतिक चेतना और बच्चों में संस्कार निर्माण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।




















