किसानों ने बताया कि इस वर्ष कई सोसाइटियों में धान खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में आधी से भी कम हो रही है। ऐसे में तय समय सीमा के भीतर सभी किसानों का धान बिक पाना मुश्किल दिख रहा है। इस स्थिति को देखते हुए किसानों ने खरीदी की लिमिट बढ़ाने और टोकन व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।

किसान पुनीत राम सेन ने बताया कि वर्तमान में सरकार द्वारा 70 प्रतिशत ऑनलाइन और 30 प्रतिशत ऑफलाइन टोकन काटे जा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल अक्सर खुलता नहीं है और मोबाइल पर केवल लोडिंग का चक्र घूमता रह जाता है। इससे किसान समय पर टोकन लेने में असमर्थ हो जाते हैं और खरीदी से वंचित होने का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों की मुख्य मांगें—
ऑनलाइन टोकन बंद कर 70 प्रतिशत ऑफलाइन और 30 प्रतिशत ऑनलाइन टोकन लागू किया जाए।
धान खरीदी की लिमिट बढ़ाई जाए ताकि हर किसान अपनी पूरी उपज बेच सके।
पिछले वर्ष की तरह सुचारु और समान गति से खरीदी प्रक्रिया संचालित की जाए।
ज्ञापन सौंपते हुए किसानों ने कहा कि धान खरीदी में देरी और टोकन प्रणाली की तकनीकी समस्या से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान करेगा, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसान सहजता से अपनी उपज बेच सकें।




















