बालोद।बालोद मुख्यालय स्थित सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में यहाँ शासकीय कार्यक्रम संपन्न हुआ, लेकिन आयोजन के बाद प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। कार्यक्रम के दौरान टेंट-पंडाल लगाने के लिए मैदान में जगह-जगह खोदे गए गड्ढों को हटाने के बाद भी समतल नहीं किया गया है, जिससे रोजाना अभ्यास करने आने वाले खिलाड़ियों के लिए यह मैदान अब खतरे का मैदान बन गया है।

स्टेडियम में प्रतिदिन सैकड़ों युवक सेना, पुलिस और अन्य विभागों में भर्ती की तैयारी के साथ-साथ एथलेटिक्स और अन्य खेलों का अभ्यास करने आते हैं। लेकिन अब मैदान में जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और असमान सतह के कारण चोटिल होने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशासनिक अमला कार्यक्रम खत्म होने के बाद टेंट और पंडाल तो समेट गया, मगर मैदान को पुनः समतल करने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं निभाई।

खिलाड़ियों ने फिर उठाई आवाज
खिलाड़ियों ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने स्टेडियम को खिलाड़ियों के अनुकूल बनाए जाने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उनका कहना है कि दानदाता स्व. सरयू प्रसाद अग्रवाल जी ने यह भूमि खेल प्रतिभाओं के विकास के उद्देश्य से दान की थी, लेकिन आज यही मैदान सरकारी आयोजनों के बाद लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है।
एक खिलाड़ी ने कहा — “हम रोज यहां दौड़ने और अभ्यास करने आते हैं, लेकिन अब हर कदम पर गिरने और चोट लगने का डर बना हुआ है। प्रशासन अगर थोड़ा ध्यान दे तो यह मैदान पूरे जिले के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकता है।”

खेल विभाग की उदासीनता पर सवाल
खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया कि खेल विभाग और नगर पालिका दोनों ही इस मैदान की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर नहीं हैं। मैदान में न तो ड्रेनेज व्यवस्था है, न ही नियमित देखरेख। बारिश के मौसम में पानी भरने से मैदान की स्थिति और खराब हो जाती है। अब गड्ढों की यह नई समस्या मैदान को और असुरक्षित बना रही है।
खेल भावना बनाम जिम्मेदारों की अनदेखी
जिले के खेलप्रेमियों का कहना है कि जिस मैदान को समाजसेवी ने खिलाड़ियों के उत्थान के लिए समर्पित किया था, वह आज लापरवाही का प्रतीक बन गया है। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तुरंत मैदान की मरम्मत कराए, सतह समतल कराए और भविष्य में किसी भी कार्यक्रम के बाद मैदान को पूर्व स्थिति में बहाल करने की जिम्मेदारी तय की जाए।

युवाओं की उम्मीद – “मैदान हमारा, सुधार आपकी जिम्मेदारी”
अब जिले के युवा खिलाड़ियों की निगाहें जिला प्रशासन और खेल विभाग की ओर हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि मैदान को जल्द ही व्यवस्थित कर उन्हें सुरक्षित अभ्यास का माहौल मिलेगा। अन्यथा यही गड्ढे कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लेकिन दूसरे दिन मैदान पहुंचने के बाद खिलाड़ी खुद मैदान में पड़े कचरे उठाने लगे और गड्ढों को अपने स्तर पर पाटते दिखाई दिए मामले पर स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता साफ तौर पर देखने को मिली।




















