
परंपरा और आधुनिकता का संगम
‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की डिजाइन में खूबसूरती से पिरोया गया है। विधानसभा सदन की छत पर धान की बालियों और पत्तियों की आकृतियाँ उकेरी गई हैं, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति को दर्शाती हैं। वहीं दरवाजों और फर्नीचर का निर्माण बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों ने किया है, जिससे यह भवन परंपरा और आधुनिकता का जीवंत मेल बन गया है।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्मार्ट विधानसभा
नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और पेपरलेस विधानसभा के रूप में विकसित किया गया है। सदन को 200 सदस्यों तक विस्तारित किया जा सकता है, जिससे यह आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
51 एकड़ में फैला, 324 करोड़ की लागत से तैयार परिसर
कुल 51 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में बांटा गया है।
विंग-ए में विधानसभा सचिवालय,
विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय,
विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं।

हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन
यह भवन पूरी तरह हरित तकनीक पर आधारित है। परिसर में सोलर प्लांट लगाए गए हैं और वर्षा जल संचयन के लिए दो सरोवर बनाए गए हैं। निर्माण में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है, जिससे यह भवन ‘ग्रीन बिल्डिंग’ का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।
500 सीटर ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल
भवन में 500 दर्शकों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 100 सीटों वाला सेंट्रल हॉल तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला पारंपरिक छत्तीसगढ़ी शैली और आधुनिक डिजाइन का शानदार मेल प्रस्तुत करती है।
तीन करोड़ जनता की उम्मीदों का प्रतीक
छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और शिल्प से सजे इस नए विधानसभा भवन में राज्य की तीन करोड़ जनता की आकांक्षाएं और आत्मगौरव झलकता है। यह भवन लोकतंत्र की गरिमा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक बनकर उभरेगा।




















