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बारिश ने बिगाड़ा किसानों का खेल,खेतों में गिरने लगी धान की फसल, किसानों के चेहरे से गायब हुई दिवाली की रौनक

बालोद (देवेंद्र साहू) पिछले कुछ दिनों से बालोद जिले में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत पर जैसे पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी धान की फसल अब गिरने लगी है, वहीं बालियों में भरा पानी किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।

बालोद जिले में किसान मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। इनमें अधिकतर किसान अगेती किस्म (Early Variety) के धान की बुवाई करते हैं, जिसकी कटाई दिवाली के बाद शुरू होती है। लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही आसमान से बरसी बारिश ने किसानों के अरमानों को झटका दे दिया है।

किसान बताते हैं कि वे पहले ही कीट प्रकोप से परेशान थे। कई किसानों ने अपने खेतों में दवा छिड़काव कर फसल को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन अब जब मौसम ने करवट ली और बारिश ने खेतों को जलमग्न कर दिया, तो फसलें झुक गईं और बालियां भीगने लगीं। इससे धान की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

किसानों की व्यथा – “सालभर की मेहनत मिट्टी में मिल गई”

बारिश के बाद खेतों का हाल देखकर किसानों की चिंता साफ झलक रही है। उनका कहना है कि इस बार की बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

 ओम प्रकाश साहू, किसान, बालोद कहते हैं — “हमने पूरे साल धान की फसल को मेहनत से सींचा। कीट लगने पर भी किसी तरह संभाला, लेकिन अब बारिश ने सब बर्बाद कर दिया।”

 मोहित साहू, किसान, बालोद का कहना है —“फसल झुक गई है, बालियां भीग गई हैं… अब कटाई में देर हुई तो पूरा धान खराब हो जाएगा।”

 युगल किशोर साहू, किसान, पाररास (बालोद) बताते हैं — “हम किसानों के लिए यही फसल पूरे साल की उम्मीद होती है। दिवाली आने वाली है, लेकिन हमारे घरों में तो अब अंधेरा है।”

दिवाली की खुशियों पर पानी

किसानों की यह स्थिति उस वक्त आई है जब पूरा देश दिवाली की तैयारियों में जुटा है। बाजारों में रौनक है, लेकिन बालोद के खेतों में मायूसी छाई है। खेतों में गिरे धान की बालियां अब भी पानी में भीगी पड़ी हैं। किसानों को अब सरकारी सहायता और मौसम की मेहरबानी की उम्मीद है। वे चाहते हैं कि प्रशासन फसल नुकसान का सर्वे कर किसानों को राहत दे, ताकि वे दिवाली में अपने घरों के दीये जला सकें।

बालोद के अन्नदाता इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।
बारिश की मार से झुकी फसलों के साथ झुक गए हैं किसानों के हौसले भी। सवाल अब यही है कि क्या प्रशासन व मौसम — इन किसानों के साथ खड़े होंगे या नहीं?

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