
करीब 13 साल पहले लाखों रुपये की लागत से बना यह पंचायत भवन अब हादसों को न्योता देने वाली इमारत में बदल गया है। दीवारों और बीम पर चौड़ी दरारें हैं, छत का प्लास्टर झड़ रहा है और किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। इसी खंडहरनुमा भवन में पंचायत की बैठकों से लेकर दफ्तरी कामकाज तक का संचालन हो रहा है।

सरपंच पिलेश्वरी नेताम और उपसरपंच मोहित देशमुख ने बताया कि भवन की बदहाली को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया है। सुशासन दिवस से लेकर जन चौपाल जैसे मंचों पर ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। उपसरपंच देशमुख ने साफ कहा — “यह भवन कार्यालय संचालन के योग्य बिल्कुल नहीं है, लेकिन मजबूरी में हमें यहां बैठना पड़ता है। यह कभी भी एक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।”

ग्रामीणों का सवाल है कि जब पंचायत भवन ही सुरक्षित न हो, तो पंचायत प्रतिनिधि गांव के विकास की योजना कैसे बना पाएंगे? महज 13 वर्षों में भवन का जर्जर होना न केवल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की पोल भी खोलता है।

ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षित पंचायत भवन के निर्माण की मांग की है, ताकि गांव के विकास की नींव फिर से मजबूती से रखी जा सके।




















