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ताँदुला जलाशय में रिसॉर्ट का गंदा पानी! रिसॉर्ट बचाने बांध से छोड़ा जा रहा पानी,सहित इन मामलों पर भाजपा नेता ने की शिकायत

ताँदुला जलाशय विवाद : वेटलैंड में रिसॉर्ट, गंदा पानी और किसानों की चिंता

बालोद। ताँदुला जलाशय का वेटलैंड एरिया एक बार फिर विवादों में है। यहाँ बने ईको फ्रेंडली रिसॉर्ट से निकलने वाला गंदा पानी जलाशय में पहुँच रहा है, जिसे पूरा बालोद शहर निस्तारी के लिए उपयोग करता है। इस मुद्दे पर भाजपा नेता मधुकांत यदु ने मुख्यमंत्री, जल संसाधन विभाग और अन्य अधिकारियों के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने जलाशय और ताँदुला नदी के अस्तित्व को बचाने की गुहार लगाई है।

किसानों और आमजन को होगी पानी की मार

मधुकांत यदु ने चेतावनी दी कि रिसॉर्ट को बचाने के नाम पर जलाशय से लगातार पानी छोड़े जाने से आने वाले गर्मी के दिनों में बड़ी समस्या खड़ी होगी। उनका कहना है कि ताँदुला बांध का पानी स्वाभाविक रूप से ओवरफ्लो होकर तालाबों, कुओं और स्टॉप डेम की क्षमता बढ़ाना चाहिए। ऐसा होने पर किसानों को बार-बार बोर खनन पर लाखों रुपए खर्च नहीं करना पड़ेगा और गर्मी की फसलों को भी पर्याप्त पानी मिलेगा।

रिसॉर्ट का गंदा पानी पहुँचा जलाशय तक

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि रिसॉर्ट का गंदा पानी सीधे जलाशय में पहुँच रहा है। यदु ने मांग की है कि रिसॉर्ट प्रबंधन को निस्तारी हेतु अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएँ। जब तक किसानों से नक्शा, खसरा, बी-1 नहीं मंगाए जाते, तब तक जलाशय से पानी न छोड़ा जाए।

बेमेतरा के लिए छोड़ा गया 100 क्यूसेक पानी

जल संसाधन विभाग ने बताया कि बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक में अल्प वर्षा होने से किसानों की मांग पर बुधवार को ताँदुला जलाशय का मुख्य गेट खोला गया। नहर के जरिए 100 क्यूसेक पानी खेतों में छोड़ा गया है। कुछ दिन पहले सेलूद के पास माइनर टूटने से गेट बंद कर दिया गया था, जिसे अब मरम्मत कर पुनः खोला गया है।

वेटलैंड एरिया में बना रिसॉर्ट, सवालों के घेरे में पुरानी अनुमति

जानकारी के मुताबिक, ताँदुला जलाशय क्षेत्र में जिस जगह पर रिसॉर्ट का निर्माण हुआ है, वह वेटलैंड एरिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण विभाग के मुताबिक इन संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति ही नहीं होती। बावजूद इसके, यहाँ पहले मुरुम की खुदाई कराई गई और बाद में भवनों का निर्माण भी करा दिया गया। इस पर अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस निर्माण को अनुमति किसने दी और उस समय जिम्मेदार अधिकारी कहाँ थे।

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