
कलेक्टर से मिलने पर अड़ी महिलाएं
महिलाओं ने मुख्यमंत्री के नाम अपना ज्ञापन सीधे कलेक्टर को ही सौंपने की जिद पर अड़ी रहीं। इस दौरान जिला प्रशासन के कई अधिकारी आंदोलनकारी महिलाओं से बात करने पहुंचे और ज्ञापन लेने की कोशिश की, लेकिन मितानिनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी अधिकारी को ज्ञापन नहीं सौंपेंगी। तीन घंटे तक महिलाएं कलेक्ट्रेट गेट के सामने डटी रहीं और बार-बार सिर्फ कलेक्टर से मिलने की मांग दोहराती रहीं।

बारिश में भी नहीं टूटी हिम्मत
लगातार तेज बारिश के बावजूद महिलाएं टस से मस नहीं हुईं। भीगते हुए भी वे अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करती रहीं और सरकार पर चुनावी वादे तोड़ने का आरोप लगाती रहीं। आखिरकार जिला प्रशासन के समझाने के बाद मितानिन संघ की दर्जनभर से अधिक महिला प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर से मुलाकात की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।आंदोलनरत मितानिनों ने अपनी दो प्रमुख मांगें रखीं—
1. मितानिनों को एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) में शामिल किया जाए।
2. मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त की जाए।

मितानिनों का कहना है कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में इन्हीं मुद्दों पर वादे किए थे, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी भी तरह की ठोस पहल नहीं हुई है।
जिला अध्यक्ष माहेश्वरी साहू ने कहा—“हम अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं। चुनाव में किए गए वादे पूरे होने चाहिए। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।”

बालोद की यह तस्वीर साफ दिखाती है कि अब मितानिनें पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। सरकार के लिए यह बड़ा सवाल है कि क्या चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाया जाएगा या फिर आंदोलन और उग्र होगा।




















