प्रदेश रूचि

एनएचएम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज से, स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के कगार पर

रायपुर। शासन की बेरुखी और मांगों की अनदेखी से नाराज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों ने इस बार आपातकालीन सेवाओं और एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) को भी बंद रखने का निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने की आशंका है।

संघ का आरोप – सरकार का अड़ियल रवैया

एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी, प्रदेश महासचिव कौशलेश तिवारी, डॉ. रविशंकर दीक्षित, पूरन दास, हेमंत सिन्हा, श्याम मोहन दुबे और प्रफुल्ल कुमार ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि 15 अगस्त तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, जिसके चलते मजबूरन कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है।

एनएचएम कर्मियों ने सरकार से 10 बड़ी मांगें रखी हैं –

1. संविलियन / स्थायीकरण

2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना

3. ग्रेड पे निर्धारण

4. कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता

5. लंबित 27% वेतन वृद्धि

6. नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण

7. अनुकम्पा नियुक्ति

8. मेडिकल व अन्य अवकाश सुविधा

9. स्थानांतरण नीति

10. न्यूनतम 10 लाख का कैशलेस चिकित्सा बीमा

20 साल की सेवा, फिर भी उपेक्षा”

कर्मचारियों ने याद दिलाया कि पिछले 20 वर्षों से वे प्रदेश के सुदूर इलाकों तक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ बने हुए हैं। कोविड-19 महामारी में भी उनकी भूमिका अहम रही, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है।

राजनीतिक समर्थन, पर वादे अधूरे

संघ के प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि मौजूदा सरकार के कई बड़े नेता – विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप सहित कई नाम – पूर्व में एनएचएम कर्मचारियों के मंचों से समर्थन जताते रहे हैं।
इतना ही नहीं, चुनाव घोषणा पत्र “मोदी की गारंटी” में भी नियमितीकरण का वादा किया गया था, लेकिन 20 महीनों में 160 से अधिक ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं मिला।

स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट

संघ ने चेतावनी दी है कि इस आंदोलन से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। संघ ने स्पष्ट कहा –
अब कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य हैं। यदि शासन ने तत्काल संवाद और समाधान की पहल नहीं की, तो स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!