नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों को बधाई देते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदमों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि हमारी स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और एकता का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि 78 साल पहले मिली आज़ादी के बाद भारत ने लोकतंत्र को पूरी निष्ठा से अपनाया और संविधान के चार मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता—को राष्ट्र की आधारशिला बनाया। उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें इतिहास की पीड़ा को कभी नहीं भूलना चाहिए और उन पीड़ितों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए।
आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता
मुर्मु ने कहा कि भारत आज 6.5% GDP वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति और निरंतर बढ़ते निर्यात को उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने बुनियादी ढांचे, भारतमाला परियोजना, रेलवे आधुनिकीकरण और कश्मीर घाटी में रेल संपर्क जैसे कदमों को ऐतिहासिक उपलब्धियां बताया।
डिजिटल इंडिया से AI तक
राष्ट्रपति ने बताया कि लगभग सभी गांव 4G कनेक्टिविटी से जुड़े हैं और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत दुनिया में अग्रणी बन चुका है। उन्होंने India-AI मिशन के माध्यम से 2047 तक भारत को ग्लोबल AI हब बनाने की आकांक्षा भी जताई।
समाज के तीन प्रमुख स्तंभ – युवा, महिलाएं और वंचित वर्ग
राष्ट्रपति ने कहा कि अमृत काल में इन तीन वर्गों की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया, खेलों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिला सशक्तीकरण का यथार्थ स्वरूप करार दिया।
सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर
मुर्मु ने आतंकवाद की निंदा करते हुए कश्मीर में हुए हमले को कायराना बताया और कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को सिद्ध कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आक्रमणकारी नहीं, लेकिन आत्मरक्षा में निर्णायक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
पर्यावरण और भविष्य का आह्वान
राष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए जीवनशैली में बदलाव का आह्वान किया और भ्रष्टाचार के प्रति Zero Tolerance की प्रतिज्ञा दोहराई। उन्होंने कहा— “भ्रष्टाचार और दंभ, लोकतंत्र के अनिवार्य परिणाम नहीं होने चाहिए।”
देशवासियों के लिए संदेश
संबोधन के अंत में उन्होंने सैनिकों, पुलिस बलों, न्यायपालिका, सिविल सेवाओं, विदेश में कार्यरत भारतीय अधिकारियों और प्रवासी भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति मुर्मु का यह संदेश न केवल बीते 78 वर्षों की उपलब्धियों का सार है, बल्कि आने वाले 22 वर्षों में विकसित भारत के सपने को साकार करने का राष्ट्रीय संकल्प भी है।




















