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जब कलम थामने वालों ने कुदाल उठाई — बालोद के पत्रकारों ने हरियाली को बनाया साझा सरोकार

बालोद | बालोद में चल रही “एक पेड़ माँ के नाम” मुहिम अब सिर्फ प्रशासन की नहीं रही, अब यह ज़मीन से जुड़ी हर संवेदनशील आत्मा की आवाज़ बन चुकी है। इस आवाज़ में आज ज़ोर तब और बढ़ा जब जिले के पत्रकारों ने अपने दफ्तर छोड़, खेत-फॉरेस्ट की मिट्टी से रिश्ता जोड़ा।

ग्राम सिवनी के रिजर्व फॉरेस्ट क्रमांक 248 में जिला प्रेस क्लब के सदस्यों और जिले के कई वरिष्ठ मीडिया प्रतिनिधियों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को आत्मसात किया। ये वही लोग हैं जो आमतौर पर कलम और कैमरे से समाज को दिशा देते हैं—आज उन्होंने खुद अपने हाथों से पेड़ लगाकर मिसाल कायम की।

इस अवसर पर जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष संतोष साहू, महासचिव राहुल भूतड़ा, रवि भूतड़ा, परस साहू,किशोर साहू, लक्ष्मीकांत बंसोड़,संजय सोनी,अनीश राजपूत,देवेन्द्र साहू, राकेश द्विवेदी, नरेश श्रीवास्तव, अमजद चैहान, जागेश्वर सिन्हा, खिलावन प्रसाद चंद्राकर, मीनू साहू,विजय जैन मित्तल, अजय अग्रवाल, सौरभ जैन, हरिवंश देशमुख, शैलेश सिंह, फिलीप चाको,साजू चाको, तिलकराम देशमुख, रूपचंद जैन, सहित अन्य पत्रकारों ने वृक्षारोपण कर यह संदेश दिया कि पर्यावरण की जिम्मेदारी हम सबकी है।

कार्यक्रम में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, जनसंपर्क अधिकारी चन्द्रेश ठाकुर और वन विभाग की उपमंडलाधिकारी डिंपी बैस भी मौजूद रहे और उन्होंने भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।

इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की पहल अब एक प्रशासनिक प्रयास नहीं, बल्कि जन-चेतना का आंदोलन बन चुकी है। जब पत्रकार—जो खुद जनमत के रचयिता हैं—ऐसे किसी अभियान में भाग लेते हैं, तो यह अभियान सिर्फ खबर नहीं रहता, एक क्रांति बन जाता है।

बालोद की ज़मीन पर इन पौधों के साथ अब रिश्ते भी उगे हैं—माँ के नाम, प्रकृति के नाम और आने वाली पीढ़ियों के नाम।

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