प्रदेश रूचि

Saving Ishika: एक साँस की कीमत, एक माँ-बाप की बेबसी और सरकार से आखिरी उम्मीद

Saving Ishika: एक मासूम की ज़िंदगी अब सरकार की मदद पर टिकी है

बालोद, छत्तीसगढ़। बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लाक के ग्राम कजराबांधा के एक साधारण किसान परिवार की एक साल की बच्ची इशिका साहू आज असाधारण संकट से जूझ रही है। जन्म से ही आहार नली (Esophagus) न होने की गंभीर शारीरिक स्थिति ने इस मासूम की ज़िंदगी को दर्द और संघर्ष से भर दिया है। इशिका को आज भी भोजन सामान्य तरीके से नहीं दिया जा सकता—एक पाइप के जरिए उसके शरीर में पोषण पहुँचाया जाता है।

उसके माता-पिता, ईश्वर साहू और लीला साहू, ने बच्ची की हर साँस को बचाने के लिए अब तक अपनी सारी जमा पूंजी—करीब 15 लाख रुपए—इलाज में खर्च कर दी है। लेकिन दुर्भाग्यवश अब भी इशिका पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई है। डॉक्टर्स ने आगे के इलाज के लिए और 7 लाख रुपए की ज़रूरत बताई है। इस आर्थिक बोझ के सामने यह परिवार अब खुद को पूरी तरह बेबस महसूस कर रहा है।

सिर्फ ज़िंदा नहीं, जीना चाहती है इशिका

ईश्वर साहू बताते हैं,“हमने जो कुछ भी पास था, वो इलाज में लगा दिया… अब हाथ फैलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। सिर्फ चाहत है कि हमारी बेटी भी बाकी बच्चों की तरह खिलखिला सके।”

माँ लीला साहू की आँखों में हर वक्त चिंता और थकावट की लकीरें साफ़ झलकती हैं। उन्होंने कहा, “हर दिन डर के साए में गुजरता है। उसके दर्द को देखना आसान नहीं है… बस सरकार से गुज़ारिश है कि हमारी बच्ची की जान बचा लें।”

सरकार ही अब आखिरी उम्मीद

ईश्वर और लीला ने विगत दिनों जिला कलेक्टोरेट पहुँचकर सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री राहत कोष या अन्य किसी सरकारी योजना के माध्यम से उन्हें मदद मिले ताकि इशिका का इलाज मुंबई या हैदराबाद के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में जल्द हो सके।

बालोद कलेक्टोरेट में उन्होंने बाकायदा आवेदन भी जमा किया है और अब प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

समाज से भी अपील

इस मुश्किल घड़ी में जहां सरकार से उम्मीद की जा रही है, वहीं समाज के सक्षम वर्ग से भी इस परिवार को मदद की दरकार है। यदि समय रहते इलाज न हुआ तो इशिका की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

 अंत में एक सवाल:

क्या इस देश में जन्म लेने वाली हर मासूम को जीने का अधिकार नहीं होना चाहिए?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!