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विधानसभा घेराव पर अड़े NHM संविदा कर्मचारी, आंदोलन सातवें दिन भी जारी | स्वास्थ्य सेवाएं दो दिन से बाधित

रायपुर।छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के करीब 16,000 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन अब उग्र मोड़ पर पहुंच गया है। सातवें दिन भी राजधानी रायपुर में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और विधानसभा घेराव की कोशिश की, जिस दौरान पुलिस के साथ झूमाझटकी की स्थिति भी बनी। इस आंदोलन के चलते प्रदेशभर में दो दिनों से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रही हैं।

वार्ता का प्रयास, पर समाधान नहीं

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की ओर से स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. खेमराज सोनवानी और प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

चरणबद्ध आंदोलन का विवरण

10 जुलाई: सभी विधायकों को सौंपा गया ज्ञापन

11 जुलाई: भाजपा जिलाध्यक्षों को ज्ञापन

12–15 जुलाई: कार्यस्थलों पर काली पट्टी लगाकर सांकेतिक विरोध

16 जुलाई: सभी 33 जिलों में ताली-थाली रैली, धरना, कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन

17 जुलाई: विधानसभा घेराव, राजधानी में प्रदर्शन और पुलिस से नोकझोंक

मांगें जो वर्षों से लंबित

NHM कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:

संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण

जॉब सुरक्षा और ग्रेड पे

अनुकंपा नियुक्ति और मेडिकल बीमा

27% लंबित वेतन वृद्धि का भुगतान

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने स्पष्ट कहा है कि “यदि 15 अगस्त तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तो प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी और आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

कोरोना योद्धा’ आज हाशिए पर

कर्मचारियों ने बताया कि वे 20 वर्षों से ‘समान काम के बदले समान वेतन’ और नियमितीकरण जैसी मूलभूत मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “कोरोना काल में हमसे ताली-थाली बजवाई गई, लेकिन आज वही सरकार हमारी आवाज नहीं सुन रही।”

प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने कहा, “हमने अब तक 100 से अधिक बार ज्ञापन, मंत्री, विधायक, सांसद और अधिकारियों को सौंपे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह मौन है।”

अब आर-पार की चेतावनी

संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने 15 अगस्त तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी जाएगी और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

स्थिति गंभीर, पर समाधान अधर में

प्रदेश में फिलहाल स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह स्थिति आम जनता के लिए संकट का कारण बन सकती है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं — क्या संविदा कर्मियों को उनका हक मिलेगा या यह आंदोलन और लंबा खिंचेगा?

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