क्या था मामला?
टोला पारा निवासी किसान यशवंत कुमार ने सेवा सहकारी समिति कुसुमकसा से ₹64,599 का कृषि ऋण लिया था। शासन के नियम अनुसार 6 माह तक इस पर कोई ब्याज नहीं बनता, लेकिन किसान से पूरे 6 माह का ब्याज ₹3,635 जोड़कर कुल ₹68,234 की वसूली कर ली गई। जब किसान ने विरोध किया, तो उसकी बात को अनसुना कर दिया गया।
फिर पहुंचे संजय बैस के पास…
समस्या का हल न निकलता देख किसान यशवंत कुमार ने पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस से संपर्क किया। संजय बैस ने तुरंत ही मामले को गंभीरता से लिया और जिला नोडल अधिकारी से नियमों की पुष्टि की। अधिकारियों ने साफ कहा कि सिर्फ एक माह का ही ब्याज लिया जा सकता है, छह महीने का नहीं।

समिति प्रबंधक अड़े रहे, लेकिन…
संजय बैस किसान और साथियों के साथ समिति पहुंचे और नियमों की जानकारी दी, लेकिन समिति प्रबंधक पहले अपनी बात पर अड़े रहे। इसके बाद जब संजय बैस ने उन्हें अधिकारियों से बात करने की बात कही और अन्य समितियों का उदाहरण भी दिया, तब जाकर प्रबंधक नियम मानने को तैयार हुए और किसान के ऋण पुस्तिका में सुधार किया गया।
सिर्फ एक माह का ब्याज वसूला गया
फिर किसान ₹64,599 मूलधन और ₹340 ब्याज यानी कुल ₹64,939 की राशि जमा कर सन्तुष्ट हुआ। अतिरिक्त ब्याज वापस कर दिया गया। किसान यशवंत ने परिवार सहित संजय बैस का आभार जताया।
सवाल यह भी: और कितने किसानों से की गई ऐसी वसूली?
यह मामला उजागर होने के बाद अब सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अन्य किसानों से भी नियम विरुद्ध अतिरिक्त ब्याज वसूला गया? और क्या समिति प्रबंधक को सरकारी नियमों की पूरी जानकारी थी?
संजय बैस का स्पष्ट संदेश
पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस ने कहा, “किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। वे अपनी मेहनत की कमाई से हर रुपया जोड़ते हैं, और उनका शोषण किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी किसान से नियम से अधिक राशि ना वसूली जाए। साथ ही क्षेत्र के किसानों से भी अपील की कि वे समय पर भुगतान करें और अपने अधिकारों की जानकारी रखें।
यह भी रहे मौजूद
इस पूरे मामले में भाजपा के उपाध्यक्ष गोपाल साहू, संतोष जैन, पुष्पजीत बैस, दीपक यादव, और हितेश गुप्ता ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और समिति में जाकर किसान को उसका हक दिलाया।




















