इस बैठक में शामिल हुए—समिति सदस्य कांति सोनेश्वरी, मीना उमाशंकर साहू, नीलिमा श्याम,जिला शिक्षा अधिकारी पी.सी. मरकले,समग्र शिक्षा के जिला अधिकारीगण,विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बालोद, गुरूर, गुण्डरदेही, डौण्डीलोहारा, डौण्डी),विकासखंड स्त्रोत समन्वयक

बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे:
जिले के स्कूलों की कुल संख्या और उनकी अवस्थिति
2024-25 की परीक्षा परिणामों की समीक्षा
शिक्षकों की पदस्थापना, अधिकता और कमी की स्थिति
प्रधानमंत्री पोषण योजना के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति
शाला प्रवेश उत्सव और पाठ्यपुस्तक वितरण की प्रगति
अति जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत एवं भवनविहीन शालाओं में भवन निर्माण
युक्तियुक्तकरण बना बड़ा मुद्दा, सभापति ने जताई नाराजगी
बैठक का सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा रहा शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण, जिसमें कई स्कूलों में नियमों के विपरीत तबादले और शिक्षकों की अनुचित पदस्थापना के मामले सामने आए।
सभापति तोमन साहू ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा:”शासन के नियमानुसार ही प्रत्येक कार्रवाई होनी चाहिए। जिन शिक्षकों के साथ अन्याय हुआ है, उनके आवेदन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निराकरण किया जाए।”
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि युक्तियुक्तकरण की त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को सुधारने के लिए जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह होंगे।

भविष्य की रणनीति: जमीन पर नजर, कागज़ से आगे बढ़े काम
सभापति साहू ने कहा कि— “अब केवल रिपोर्ट बनाने का वक्त नहीं, जमीनी कार्रवाई की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था को नीचे तक मजबूत करना होगा।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—
जहां शिक्षक कम हैं वहां तत्काल पदस्थापन हो
भवनविहीन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए
नवीन भवन निर्माण और मरम्मत कार्यों में तेजी लाई जाए
छात्रों को समय पर पाठ्यपुस्तक और मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाए

बैठक को लेकर दिखा सकारात्मक माहौल
बैठक के बाद सदस्यों और अधिकारियों में भी सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का भाव देखने को मिला। यह बैठक सिर्फ समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्पष्ट दिशा, कड़ी चेतावनी और ठोस निर्णयों के साथ खत्म हुई।
बालोद जिले में शिक्षा को लेकर अब लापरवाही की नहीं, जवाबदेही की नीति अपनाई जा रही है। सभापति तोमन साहू की यह पहल आने वाले समय में जिले के हजारों बच्चों के भविष्य को संवार सकती है।




















