प्रदेश रूचि

“वेन्डरों को जीएसटी में राहत या विभागों को चेतावनी? राज्य कर विभाग का बालोद जिप सीईओ के नाम पत्र जारी”

GST नियमों की अनदेखी पर राज्य कर विभाग की सख्ती: अब शुद्ध राशि पर ही होगी TDS कटौती, नहीं तो भुगतना होगा खामियाज़ा

बालोद | प्रदेशरुचि विशेष रिपोर्ट
राज्य कर विभाग दुर्ग ने जीएसटी नियमों की लगातार हो रही अनदेखी पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए जिला स्तर के सभी शासकीय विभागों को चेतावनी भरा पत्र जारी किया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बालोद को भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जीएसटी अधिनियम के अनुरूप अब से केवल शुद्ध राशि पर ही TDS कटौती की जाए।

क्या है मामला?

वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव द्वारा जारी परिपत्र के हवाले से कहा गया है कि कई सरकारी विभागों द्वारा भुगतान के समय व्यवसायियों और ठेकेदारों से जीएसटी टीडीएस सकल सप्लाई राशि पर काटा जा रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ जीएसटी अधिनियम, धारा 61 के मुताबिक यह कटौती शुद्ध सप्लाई राशि पर की जानी चाहिए — अर्थात GST को घटाने के बाद की गई राशि पर।

इस प्रक्रिया की अनदेखी से व्यवसायियों का टर्नओवर अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है, जो न केवल वित्तीय गड़बड़ी को जन्म देता है, बल्कि वेन्डरों के लिए भी कर निर्धारण में कठिनाइयाँ खड़ी करता है।

क्या कहा है विभाग ने?

राज्य कर विभाग, दुर्ग की ओर से जारी पत्र (क्र. सं. आ./रा.कर/जीएसटी-राजस्व/2025/16) में स्पष्ट कहा गया है कि—

> “अब से ₹2.50 लाख से अधिक या उससे कम के सभी भुगतान पर 2% जीएसटी टीडीएस (1% SGST + 1% CGST) की कटौती केवल शुद्ध आपूर्ति राशि पर की जाए। साथ ही, GSTR-7 विवरण प्रतिमाह अनिवार्य रूप से दाखिल किया जाए।”

 

विभागों की लापरवाही उजागर

यह पत्र एक तरह से सरकार के ही विभागों की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी है। इसका सीधा अर्थ यह भी है कि अब तक कई विभाग नियमों को ताक पर रखकर टीडीएस काटते रहे हैं — जिससे व्यवसायियों की कर देनदारी फालतू बढ़ती रही। राज्य कर विभाग की यह कार्रवाई दर्शाती है कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या असर होगा इस निर्देश का?

विक्रेताओं को राहत: शुद्ध राशि पर कटौती से व्यवसायियों की वास्तविक आय ही कर के दायरे में आएगी, जिससे उनके टर्नओवर पर असर नहीं पड़ेगा।

विभागों पर दबाव: अब सभी भुगतान करने वाले विभागों को जीएसटी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा विभागीय कार्रवाई संभव है।

सिस्टम में पारदर्शिता: यह निर्देश राज्य के वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

क्या अब जागेंगे विभाग?

यह सवाल अब जरूरी हो गया है कि क्या राज्य के अन्य विभाग भी इस चेतावनी से सबक लेंगे या फिर नियमों की अनदेखी जारी रहेगी? प्रदेशरुचि की यह रिपोर्ट विभागीय जवाबदेही तय करने और कारोबारी समुदाय के हितों की रक्षा की दिशा में एक प्रयास है।

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