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“Emergency@50: जब लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया था..जब कलम पर लगी थी बेड़ी, जब बोलना बना जुर्म…50 साल बाद भी याद है वो काली रात”..पढ़े पूरी खबर

📰 “आपातकाल के 50 वर्ष: लोकतंत्र के काले अध्याय पर बालोद में भाजपा की संगोष्ठी

बालोद।भारतीय जनता पार्टी, जिला बालोद द्वारा 25 जून 2025 को ‘आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ’ पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन जिला भाजपा कार्यालय में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

 मुख्यवक्ता भूपेंद्र सवन्नी ने कहा—“25 जून 1975 को देश में थोपे गए आपातकाल ने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों—कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—को झुकने पर मजबूर किया। प्रेस की आजादी छीनी गई, नागरिकों को जेल में डाला गया और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला युद्ध जैसी किसी स्थिति में नहीं बल्कि सत्ता बचाने की मंशा से किया गया था। कांग्रेस आज भी “परिवारवाद और व्यक्ति पूजा” की मानसिकता में उलझी हुई है।

 जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा— “आपातकाल कांग्रेस की निरंकुश मानसिकता का प्रमाण था। विपक्षी नेताओं को जेल में डालकर लोकतांत्रिक मूल्यों को रौंद दिया गया।”उन्होंने जिले में आयोजित अन्य जनजागरण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।

 सांसद भोजराज नाग ने कहा—“उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दमन हुआ। जेलों में बंद लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया।”

 पूर्व जिलाध्यक्ष पवन साहू ने साझा किया दर्द—“मेरे पिता श्री दाऊ नेम सिंह को बिना कारण जेल में डाला गया था। पूरा परिवार मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना से गुजरा।”

कार्यक्रम संचालन एवं समापन

कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री राकेश ‘छोटू’ यादव ने किया, वहीं पूर्व मंडल अध्यक्ष ग्रामीण प्रेम साहू ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

विशेष उपस्थिति रही इन नेताओं की—

सांसद भोजराज नाग, जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख, यशवंत जैन, कृष्णकांत पवार, प्रीतम साहू, प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर, अभिषेक शुक्ला, संध्या भारद्वाज, मोहन जैन, प्रतिभा चौधरी, तोरण साहू, सौरभ लूनिया, कमलेश सोनी, देवेंद्र जायसवाल,विवेक वैष्णव, अनीता कुमेटी, राकेश द्विवेदी, नेहा उपाध्याय, प्रेम साहू सहित जिलेभर के सैकड़ों कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आपातकाल की विभीषिका को स्मरण करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूकता का आह्वान किया। भाजपा द्वारा यह आयोजन लोकतंत्र की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास कहा जा रहा है।

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