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तांदुला जलाशय में मछुआरों के प्रवेश पर रोक: रिसॉर्ट संचालकों की मनमानी से आजीविका पर संकट

बालोद। तांदुला जलाशय क्षेत्र में मछुआरों और लीजधारियों की आजीविका पर एक बार फिर संकट मंडराने लगा है। रिसॉर्ट संचालकों की मनमानी के खिलाफ अब मछुआ समिति ने जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है।

समिति के सदस्यों का कहना है कि तांदुला जलाशय के आसपास करीब 150 परिवार रहते हैं, जिनकी जीविका का प्रमुख साधन मछली पालन और विक्रय है। लेकिन पिछले दो वर्षों से जलाशय क्षेत्र में रिसॉर्ट, पिकनिक स्पॉट और बोटिंग की गतिविधियों के बढ़ने से मछुआरों का जीवन दूभर हो गया है।

कंटीले तारों से बंद किया रास्ता

मछुआरों का आरोप है कि जलाशय तक पहुंचने वाले रास्तों को कंटीले तारों से बंद कर दिया गया है। यहां तक कि सुखा डेम क्षेत्र, जो मछली पकड़ने और निकासी का प्रमुख स्थान है, वहां भी जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यह क्षेत्र चारों ओर से जंगल से घिरा हुआ है और जंगली जानवरों के खतरे के चलते वैकल्पिक रास्ते से आना-जाना संभव नहीं है। मछुआ समुदाय की मांग है कि पिकनिक स्पॉट वाले मार्ग पर लगे कंटीले तार हटाए जाएं और तौल सेंटर तक पहुंच के लिए एक स्वतंत्र रास्ता प्रदान किया जाए।

शिकायतें हुईं अनसुनी

मछुआरों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से भी अपनी बात रखी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।

समिति ने प्रशासन से अपील की है कि रिसॉर्ट व बोटिंग संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए और मछुआ समुदाय को आर्थिक क्षति से बचाया जाए।

शिकायत करने पहुंचे मछुआ समिति के सदस्यो ने बताया कि“हमारी रोज़ी-रोटी इस जलाशय से जुड़ी है। अगर यही रास्ता बंद कर दिया गया तो हम क्या करेंगे? प्रशासन से निवेदन है कि हमें फिर से वही रास्ता दिया जाए जिससे हम मछली पकड़कर बेच सकें,”

पहले भी उठ चुका है विवाद

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही रायपुर के एक व्यापारी ने रिसॉर्ट द्वारा वाटर वर्ल्ड में गंदे पानी के उपयोग की शिकायत की थी। अब मछुआ समुदाय की ओर से आई शिकायत ने फिर से तांदुला रिसॉर्ट संचालन को कटघरे में ला खड़ा किया है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार मछुआ समुदाय की शिकायत पर क्या कदम उठाता है। तांदुला जलाशय पर आर्थिक हितों और पारंपरिक आजीविका के टकराव ने स्थानीय सामाजिक संतुलन को चुनौती दे दी है।

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