कलेक्टर मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा— “मैं सुनने नहीं, सुलझाने आई हूं।” यही वजह रही कि जनदर्शन की प्रक्रिया औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाधान के स्तर तक पहुँची।
● दिव्यांग बालिका को मिला प्रमाणपत्र बनवाने का भरोसा
डौण्डीलोहारा ब्लॉक के ग्राम गैंजी से पहुँची दिव्यांग बालिका अरीना ने अपने लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र और राशन कार्ड की मांग रखी। कलेक्टर ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बुलाकर निर्देशित किया कि अरीना को जिला अस्पताल ले जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करवाई जाए। प्रमाणपत्र जारी करने की कार्यवाही उसी दिन शुरू कर दी गई।

● ट्राइसाइकिल की मांग पूरी, मुस्कराए चनेश्वर
गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम अर्जुंदा से आए दिव्यांग चनेश्वर ने बैटरी चलित ट्राइसाइकिल की मांग रखी। कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को निर्देशित कर जनदर्शन कक्ष में ही उन्हें ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। चनेश्वर की आंखों में राहत और धन्यवाद के भाव थे।
● बुनियादी समस्याओं पर भी गंभीरता
जनदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को भी गंभीरता से सुना गया।
ग्राम कोटगांव से आए देवेंद्र ने पानी टंकी की मरम्मत की मांग की।
ग्राम मथेना के लोगों ने निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात रखी।
सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र ने राष्ट्रीय राजमार्ग 930 पर डिवाइडर निर्माण की जरूरत जताई।
ग्राम कारूटोला के शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों ने स्कूल में शिक्षक नियुक्ति की मांग की।
गुरामी और भालू कोन्हा गांवों से बंदोबस्त त्रुटि और व्यवसायिक परिसर निर्माण से जुड़ी समस्याएँ सामने आईं।
इन सभी मांगों पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने की बात कही।

● प्रशासनिक मुखिया के संवेदनशील चेहरे की झलक
कार्यक्रम में जो सबसे उल्लेखनीय बात रही, वह था कलेक्टर मिश्रा का मानवीय और संवेदनशील व्यवहार। जनदर्शन में पहुँचे लोग प्रशासन से नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद अभिभावक से संवाद कर रहे थे। फरियादियों को केवल आश्वासन नहीं, समाधान और सम्मान भी मिला।
यह जनदर्शन एक बार फिर साबित कर गया कि जब प्रशासन संवेदनशीलता से सुनता है, तो समाधान भी सहज होता है।




















