रायपुर/बालोद। छत्तीसगढ़ के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में उपाध्यक्षों को अब सिर्फ “पद” नहीं, बल्कि “सत्ता के साथ साधन” भी चाहिए। निकाय उपाध्यक्षों ने अब संगठित रूप से मांग की है कि जिस तरह अध्यक्षों को अलग से विकास कार्यों के लिए निधि मिलती है, वैसा ही प्रावधान उपाध्यक्षों के लिए भी होना चाहिए।
इस मांग को सबसे पहले बालोद से आवाज मिली, जहां भाजपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान प्रदेश के उपाध्यक्षों ने भाजपा के प्रदेश महामंत्री और धमतरी महापौर रामु रोहरा को नगरीय प्रशासन मंत्री के नाम मांग पत्र सौंपा। इसमें प्रदेशभर के निकाय उपाध्यक्षों के लिए विकास निधि का स्वतंत्र प्रावधान करने की मांग की गई।

“हमसे भी जनता को उम्मीदें हैं” — उपाध्यक्षों की स्पष्ट बात
बालोद नगर पालिका के उपाध्यक्ष कमलेश सोनी ने कहा, “जनता समस्याओं के समाधान के लिए हमारे पास भी आती है, लेकिन जब फंड ही नहीं होता, तो हम मजबूर हो जाते हैं। उपाध्यक्षों के लिए निधि तय होनी चाहिए।”
दल्लीराजहरा के उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा, “प्रदेशभर के उपाध्यक्षों में यही पीड़ा है कि हमारे पास पद है, पर कोई अधिकार नहीं। जनता से किए वादे पूरे करने को हमारे पास संसाधन नहीं। भविष्य में इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।”
गुंडरदेही के उपाध्यक्ष विजय सोनकर ने कहा, “पार्षद निधि सिर्फ अपने वार्ड तक सीमित रहती है। उपाध्यक्ष होने के नाते कई वार्डों से लोग हमसे जुड़ते हैं। निधि नहीं मिलती, तो हम कुछ कर ही नहीं पाते।”
प्रदेश के कई उपाध्यक्षों ने दी मौजूदगी
मांग पत्र सौंपने वालों में डौंडी के संजीव मानकर, चिखलाकसा के राजू रावटे, और गुरुर की उपाध्यक्ष कुंती सिन्हा भी शामिल रहे। सभी का एक ही कहना था — जब जनता अपेक्षा करती है, तो संसाधन भी मिलने चाहिए।
अब निगाहें सरकार पर
यह पहली बार है जब निकाय उपाध्यक्षों की ओर से एकजुट होकर यह मांग प्रदेश स्तर पर पहुंचाई गई है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।




















