सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने पेश किया नया अनुबंध मॉडल, मशीनीकृत स्वच्छता सेवाएं होंगी जवाबदेह और सुरक्षित
नई दिल्ली।देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और सफाई कर्मचारियों की मौतों को रोकने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने एक अहम पहल की है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नया मॉडल अनुबंध ढांचा जारी किया है, जिसका मकसद है – स्वच्छता सेवाओं को मशीनीकृत, पेशेवर और जवाबदेह बनाना।
🔷 क्या है ये नया अनुबंध मॉडल?
नया ढांचा शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को दिशा-निर्देश देता है कि वे निजी स्वच्छता सेवा ऑपरेटरों (PSSO) को किस तरह नियुक्त करें, ताकि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई मैनुअल न होकर पूरी तरह मशीन से हो। इसके अंतर्गत:
सेफ्टी प्रोटोकॉल और कानूनी दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।
14420 हेल्पलाइन जैसे प्लेटफॉर्म से नागरिक सेवाएं जुड़ेंगी।
सेवाएं न देने या लापरवाही पर ऑपरेटरों को ब्लैकलिस्ट करने की भी व्यवस्था की गई है।
🔷 कितनी बड़ी है जरूरत?
भारत की 42 करोड़ शहरी आबादी में से 4.5 करोड़ परिवार सेप्टिक टैंक पर निर्भर हैं।
केवल 35% आबादी ही सीवर नेटवर्क से जुड़ी है।
सेप्टिक टैंक की हर 3 साल में सफाई अनिवार्य है।
🔷 सफाई मित्रों की सुरक्षा है प्राथमिकता
नए दस्तावेज़ ‘सफाई मित्र सुरक्षा पहल’ के तहत तैयार किए गए हैं। इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी सफाई कर्मचारी मैनहोल में बिना सुरक्षा उपकरण या मैन्युअल रूप से न उतरे। इसके लिए:
PSSO को मशीन और सुरक्षात्मक उपकरणों की जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी विकास निगम (NSKFDC) के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG), सफाई उद्यमियों और सूक्ष्म उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
🔷 मैनहोल नहीं, अब ‘मशीन-होल’
मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे मैनहोल को मशीन-होल में बदलें। इसके लिए:
शहरों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।
यांत्रिक उपकरण खरीदने के लिए SHG और उद्यमियों को सब्सिडी व ऋण की सुविधा दी जा रही है।
🔷 ‘नमस्ते योजना’ को मिलेगा बल
यह अनुबंध ढांचा नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) को मजबूत करेगा और मैनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक लगाने वाले कानून (PEMSR Act, 2013) के पालन को सुनिश्चित करेगा।
यह अनुबंध ढांचा न केवल स्वच्छता सेवाओं को पेशेवर और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि सफाई कर्मचारियों के जीवन और सम्मान की रक्षा भी करेगा। यह कदम देश को मशीन-आधारित, गरिमामयी और सुरक्षित शहरी स्वच्छता व्यवस्था की ओर ले जाता है।




















