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भैंसमुड़ी खदान में चाकूबाजी! बीच-बचाव में युवक घायल, रेत माफिया की दादागिरी चरम पर,खनिज विभाग मौन

बालोद। एक ओर जहां प्रशासन अवैध खनन पर कागज़ी कार्रवाई के दम भरता है, वहीं ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बालोद जिले के चर्चित भैंसमुड़ी रेत खदान में गुरुवार देर शाम चाकूबाजी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बताया जा रहा है कि टोनी सरदार नामक व्यक्ति अपने साथियों के साथ खदान में पहुंचा और वहां चाकू से हमला कर फरार हो गया।

इस दौरान जब लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो दुर्ग जिले के उतई गांव का एक ग्रामीण गोपेन्द्र साहू चाकूबाजी की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तत्काल गुरुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उसका MLC किया गया।

पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन FIR नहीं!

सूचना मिलते ही गुरुर  पुरुर पुलिस व थाना प्रभारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया। हालांकि, घटना को लेकर अब तक किसी भी पक्ष ने FIR दर्ज नहीं कराई, जिससे पुलिस भी पशोपेश में है। फिर भी पुलिस ने मामले को हल्के में नहीं लिया और घायल युवक की MLC रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

यह स्थिति सवाल खड़े करती है—क्या लोग अब रेत माफिया के डर से चुप्पी साधने लगे हैं?

रेत माफिया का दबदबा: जहां चाहा, वहां खनन!

बालोद जिले की खदानें रेत माफिया के लिए ‘ओपन फील्ड’ बन चुकी हैं। भैंसमुड़ी, पोंड, मर्रामखेड़ा जैसे इलाकों में अवैध रेत खनन खुलेआम जारी है। स्थानीय मीडिया में बार-बार खबरें आने के बावजूद, खनिज विभाग महज़ ‘फॉर्मल’ कार्रवाई करता है। अगले ही दिन दोबारा खनन शुरू हो जाता है—इससे साफ है कि माफिया बेखौफ हैं।

राजनीतिक संरक्षण का खुला खेल, विभाग मौन सहमति में लीन!

माना जा रहा है कि बालोद जिले में अवैध रेत खनन किसी गली-कूचे का धंधा नहीं, बल्कि एक संगठित राजनीतिक सिंडिकेट बन चुका है। सत्तारूढ़ पार्टी से लेकर विपक्ष तक, दोनों ही दलों के कुछ स्थानीय नेता इस कारोबार में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हैं।

सत्ता पक्ष चुप है,

विपक्ष खामोश है,

और खनिज विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।

इस ‘राजनीतिक-विभागीय गठजोड़’ का फायदा रेत माफिया को मिल रहा है, जो दिनदहाड़े सरकारी जमीन से रेत उठाकर करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के अधीन विभाग, फिर भी माफिया बेखौफ!

सबसे हैरानी की बात यह है कि खनिज विभाग खुद मुख्यमंत्री के अधीन है। बावजूद इसके न बालोद, न कांकेर, न धमतरी—कहीं भी अवैध रेत खनन पर लगाम नहीं लग रही है।

क्या सरकार को इसकी जानकारी नहीं है?
या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज़ किया जा रहा है?

 

अब सवाल यह है…

क्या भैंसमुड़ी खदान की चाकूबाजी प्रशासन की नींद तोड़ेगी?

FIR दर्ज न होने से क्या माफियाओं को सीधा संदेश नहीं मिल रहा कि वो बेकाबू हैं?

क्या रेत के इस काले कारोबार में अब आम लोगों की जान जोखिम में आ चुकी है?

जब रेत माफिया कानून से ऊपर हो जाएं, तो समझिए लोकतंत्र की नींव हिलने लगी है।

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