बालोद,पर्यावरण दिवस पर जहां जिलेभर में अधिकारी और जनप्रतिनिधि “एक पेड़ मां के नाम” जैसे जागरूकता अभियानों के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दे रहे थे, वहीं डौंडी ब्लॉक के मर्रामखेड़ा गांव में पर्यावरण के साथ मज़ाक चलता रहा।
लगातार पिछले दस दिनों से यहां चैन माउंटेन मशीनों के जरिए रेत का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। मर्रामखेड़ा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, और ऐसे इलाकों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्पष्ट गाइडलाइन है कि किसी भी तरह का खनन प्रतिबंधित है।
फिर भी न तो खनिज विभाग और न ही स्थानीय प्रशासन ने कोई संज्ञान लिया। रेत के इस अवैध खेल से पर्यावरण को तो नुकसान हो ही रहा है, साथ ही शासन की “हरियाली और जीवन रक्षा” की मुहिम पर भी सवालिया निशान लग रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि दिन-रात बड़ी बड़ी हाइवा ट्रके और भारी मशीनें रेत निकालने में लगी रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हैं। यह लचर व्यवस्था न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रही है, बल्कि शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रही है।
क्या पर्यावरण संरक्षण सिर्फ एक दिन का दिखावा बनकर रह गया है?




















