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सत्ता के दरबार में जनसरोकार की बात:- तोमन साहू ने सीएम को सौंपा सड़क-मुआवजा-बोनस का ट्रिपल एजेंडा

 

मुख्यमंत्री से मिले जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू, बालोद जिले की जर्जर सड़कों के डामरीकरण की रखी मांग

डुबान क्षेत्र के किसानों को धान बोनस और रबी फसल के नुकसान पर मुआवजे की भी की मांग

बालोद। सुशासन तिहार के तीसरे चरण के अंतर्गत बुधवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बालोद जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान जिला पंचायत बालोद के उपाध्यक्ष तोमन साहू ने बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात की और जिले में विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समस्याओं को उनके समक्ष रखा।

मुख्य रूप से तोमन साहू ने जिले के विभिन्न अंचलों में स्थित जर्जर और वर्षों से उपेक्षित सड़कों के डामरीकरण की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आवागमन के लिए आवश्यक प्रमुख मार्गों की दयनीय स्थिति को रेखांकित किया, जिससे जनजीवन और कृषि कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रस्तावित मार्गों का शीघ्र प्राक्कलन बनाकर भेजा जाए।

किन सड़कों के डामरीकरण की मांग की गई:

जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू द्वारा जिन सड़कों के डामरीकरण की मांग की गई, उनमें शामिल हैं:

सांकरा से नारागांव, बड़भूम होते हुए कन्हारपुरी तक – 32 किमी

जमरुवा से साल्हेटोला – 2.5 किमी

नर्रा से नारागांव – 4 किमी

बेलोदी से सतमरा, सियनमरा होते हुए अरमरीकला तक – 8 किमी

सतमरा से डांडेसरा – 2 किमी

जगतरा राष्ट्रीय राजमार्ग से नयापारा तक – 1.20 किमी

खरथूली से खड़ेनाडीह – 2 किमी

रेंगनी से खरथूली – 2 किमी

सांकरा से दरबारी नवागांव होते हुए डेंगरापार – 4 किमी

सांकरा से परसदा – 2 किमी

घुमका से खपरी – 4 किमी

डंगनिया से परसोदा – 2.20 किमी

नाहंदा से कन्याडबरी – 10 किमी

हर्राठेमा चौक से मुल्ले होते हुए मालगांव – 8 किमी

नागाडबरी से सूर्रा तक (पुल-पुलिया सहित) – 4 किमी

साहू ने कहा कि इन मार्गों पर यातायात की स्थिति बेहद खराब है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी विकराल हो जाती है।

डुबान क्षेत्र के किसानों को नहीं मिल पा रहा धान बोनस

ज्ञापन सौंपने के दौरान तोमन साहू ने मुख्यमंत्री का ध्यान बालोद जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 में स्थित मालगांव और आसपास के गांवों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि इन गांवों के किसान जल संसाधन विभाग से लीज़ पर जमीन लेकर खेती करते हैं, जो डुबान क्षेत्र में आता है। ऐसे में इन किसानों को शासन के समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत मिलने वाला बोनस नहीं मिल पाता, जिससे वे आर्थिक रूप से लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।

साहू ने मांग की कि शासन इस विषय में सकारात्मक पहल करते हुए ऐसे किसानों को भी बोनस योजना का लाभ दे, ताकि उनकी मेहनत और उपज का उचित मूल्य मिल सके।

रबी फसल के नुकसान पर मुआवजे की मांग

बालोद जिले में बीते कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश के कारण रबी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों किसानों की फसलें खेतों में ही खराब हो गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तोमन साहू ने मुख्यमंत्री से मांग की कि फसल क्षति का शीघ्र सर्वे कर किसानों को समुचित मुआवजा दिया जाए।

उन्होंने बताया कि पहले भी किसान प्राकृतिक आपदा के कारण घाटे में रहे हैं और इस बार फिर रबी फसलों के नष्ट होने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगाई है। ऐसे में राज्य सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए राहत देना चाहिए।

जनप्रतिनिधि की जिम्मेदार पहल

तोमन साहू की इस पहल को स्थानीय जनहित के मुद्दों को शासन स्तर पर प्रभावी रूप से रखने के एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने न केवल सड़कों के डामरीकरण जैसे मूलभूत संरचना से जुड़े विषय को उठाया, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं – बोनस और मुआवजे – को भी सामने रखा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया

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