यह शिविर 26 से 28 मई तक प्रतिदिन सुबह 5:30 से 7:30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र की छात्राएं भाग ले सकती हैं। प्रतिभागियों के लिए पीले और हरे रंग की टी-शर्ट को ड्रेस कोड के रूप में निर्धारित किया गया है, जिससे अनुशासन और एकता की भावना को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रथम दिवस पर आत्मरक्षा प्रशिक्षक योगेश्वर मानिकपूरी ने प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने आत्मरक्षा को आज की आवश्यकता बताते हुए छात्राओं से कहा कि उन्हें आत्मबल, सजगता और साहस के साथ हर स्थिति का सामना करना सीखना चाहिए।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत सुरसुली के सरपंच ईश्वर देवांगन, खेरथा कॉलेज जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष विवेक वैष्णव, शिक्षकगण माधव साहू, रामप्रसाद साहू, वोमेंद्र साहू, महेंद्र साहू और समिति के अध्यक्ष भरत देवांगन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विवेक वैष्णव: शिक्षा और सशक्तिकरण के सजग प्रहरी
खेरथा कॉलेज जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष विवेक वैष्णव महिला सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व विकास के एक प्रतिबद्ध समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने इस शिविर में न केवल सक्रिय सहभागिता दिखाई, बल्कि प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा,
“समाज में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत तब होती है, जब हमारी बेटियां स्वयं की रक्षा करने में सक्षम बनती हैं। यह शिविर केवल आत्मरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-विश्वास और आत्म-गौरव की राह है।”
विवेक वैष्णव वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना से जुड़ी पहलों में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के प्रशिक्षण से नई पीढ़ी को नेतृत्व का अवसर और समाज को सुरक्षित भविष्य मिलता है।
यह शिविर केवल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि यह छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना को भी जागृत करने का माध्यम बन रहा है – एक सशक्त समाज की नींव रखने की दिशा में यह कदम अत्यंत सराहनीय है।




















