प्रदेश रूचि

खुरसुनी जनसमस्या शिविर बना सौगातों का मंच, 929 आवेदनों का मौके पर निपटाराबालोद में महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, किसका दांव पड़ेगा भारी?…पढ़े पूरी खबर सिर्फ प्रदेशरुचि पर…ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने दिखाई एकजुटता, हर माह होगी बैठक, प्रतिभावान बेटियों के सम्मान का संकल्पआईटीआई में पढ़ाई छोड़ छात्रों से मजदूरी, निर्माण कार्य के दौरान छात्र घायल हादसे में दोनों हाथों की पांच उंगलियां कटीं, छात्रों ने वर्षों से श्रम कराने का लगाया आरोपराष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस पर बालोद में प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान, जल संरक्षण और पशु-पक्षियों के लिए पानी को लेकर हुई सार्थक चर्चा

बालोद का सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम बदहाल — खिलाड़ियों की जगह शराबियों का कब्जा, युवा प्रतिभाएं खतरे में

बालोद,जिला मुख्यालय बालोद का एकमात्र स्टेडियम, सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम, इन दिनों खेल का केंद्र नहीं, बल्कि शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। जहां कभी युवा खिलाड़ी जिले का नाम रोशन करने का सपना देखते थे, अब वहीं मैदान उनकी उम्मीदों को कुचलता नजर आ रहा है।

रखरखाव में लापरवाही, मैदान बना जख्म देने वाला क्षेत्र

स्टेडियम की हालत इतनी खराब है कि चारों तरफ गंदगी, गैलरी में टूटी शराब की बोतलें, रेत और गिट्टियाँ बिखरी हुई हैं। घास लगाने के नाम पर सरकारी राशि तो खर्च की गई, लेकिन नतीजा शून्य है। जगह-जगह बिछी गिट्टियों के कारण खिलाड़ी घायल हो रहे हैं। टूटी बोतलों से पैरों में कट लगना आम हो गया है।

खिलाड़ियों की व्यथा: मैदान नहीं, मलबा मिला

स्थानीय खिलाड़ी अजय यादव राम नेताम का कहना है, “हम हर दिन सुबह-शाम अभ्यास के लिए आते हैं, लेकिन मैदान की हालत देखकर निराशा होती है। अब डर लगता है कहीं कोई गंभीर चोट न लग जाए।”

चंदन कुमार,सोनू यादव ने कहा, “कई साथी चोटिल हो चुके हैं। टूटी बोतलें और गिट्टियाँ हर जगह बिखरी हुई हैं। प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।”

प्रेम कुमार,नवदीप ने बताया, “बालोद जैसे छोटे जिले में एक ही स्टेडियम है। अगर वो भी सुरक्षित नहीं रहा, तो हम कहां खेलें? हम मेहनत करना चाहते हैं लेकिन हमें सही मंच नहीं मिल पा रहा है।”
इस मैदान में इमरान खान,दिनेश गजेंद्र,समीर,ऋषभ बाफना,सिद्धार्थ बाफना,आशीष शर्मा, मनीष पाठक,गुमान कुमार, अनिकेत जान, और चंदन ढीमर, राहुल निर्मलकर, ईश्वर ठाकुर,जैसे कई स्थानीय खिलाड़ी नियमित रूप से अभ्यास करते हैं,तो वही पुलिस, अर्ध सैनिक,सेना और अन्य शासकीय सेवाओ में जाने से पहले दूर दराज से युवा इस मैदान में आकर अपना अभ्यास भी करते रहे है,लेकिन अब स्टेडियम की हालत उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर रही है।

खिलाड़ियों की उम्मीदें जनप्रतिनिधियों से

जिला प्रशासन और खेल विभाग की अनदेखी के कारण खिलाड़ियों में आक्रोश है, लेकिन हाल ही में निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों से अब सभी को उम्मीद है कि वे मैदान की हालत सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

पुनर्जीवन की जरूरत

स्टेडियम को साफ-सुथरा, सुरक्षित और खेल के योग्य बनाने की जरूरत है। एक सशक्त खेल अवसंरचना ही युवाओं को नशे और अपराध की ओर जाने से रोक सकती है। अगर जल्द ही पहल नहीं की गई, तो बालोद जैसे छोटे शहर की खेल प्रतिभाएं गुमनामी में खो जाएंगी।

अब वक्त है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जागें और इस स्टेडियम को फिर से खेल का केंद्र बनाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!