भारत और पाकिस्तान में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब दोनो देशों के बीच युद्ध के आसार भी बढ़ने लगा है जिसके मद्देनजर 7 मई 2025 को देशभर के 244 सिविल डिफेंस जिलों में एक साथ राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। यह मॉक ड्रिल युद्ध जैसे हालातों में नागरिकों को सुरक्षित रखने और उन्हें आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की जा रही है।

मॉक ड्रिल में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल होंगी
– एयर रेड सायरन: संभावित खतरे वाले इलाकों में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बजाए जाएंगे।
– *नागरिकों की ट्रेनिंग*: स्कूलों, दफ्तरों और कम्युनिटी सेंटर्स में वर्कशॉप होंगे जहां लोगों को सिखाया जाएगा कि खतरे के वक्त कैसे काम करें।
– *ब्लैकआउट*: कुछ शहरों में अचानक लाइट्स बंद कर दी जाएंगी ताकि दुश्मन को लक्ष्य न दिखाई दे।
– *कैमोफ्लाज*: सेना के ठिकानों, मोबाइल टावर और पावर प्लांट जैसे अहम जगहों को ढककर दुश्मन की नजर से छिपाने की प्रैक्टिस की जाएगी।
– *निकासी ड्रिल*: ज्यादा खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की रिहर्सल की जाएगी।
यह मॉक ड्रिल देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित की जाएगी, जिसमें स्थानीय प्रशासन, सिविल डिफेंस वार्डन, होम गार्ड्स, एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस और स्कूल-कॉलेज के छात्र भाग लेंगे।

छग का दुर्ग जिले में भी मॉकड्रिल संभव
गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार छत्तीसगढ़ के दुर्ग में भी मॉकड्रिल आयोजित की जा सकती है, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्र है। मॉकड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दुर्ग में मॉकड्रिल के दौरान निम्नलिखित गतिविधियाँ हो सकती हैं:
– एयर रेड सायरन बजाना
– नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना
– आपातकालीन सेवाओं की तैयारी की जांच करना
– नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों में व्यवहार करने के तरीके के बारे में जागरूक करना
यह मॉकड्रिल दुर्ग के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षित रहने के तरीके के बारे में जागरूक करेगी।




















