इस शिविर के दौरान, नम्रता निर्मलकर ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोकभाषा, लोककला और परंपराओं को अन्य विश्वविद्यालयों से आए स्वयंसेवकों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक विविधता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करते हुए छत्तीसगढ़ की विरासत और परंपराओं का प्रचार-प्रसार किया। उनके इस प्रयास की सराहना शिविर के आयोजकों और स्वयंसेवकों द्वारा की गई।
राज्य स्तरीय शिविर से लौटने के पश्चात महाविद्यालय और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा नम्रता निर्मलकर का विशेष स्वागत और अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी प्रो. जी.एन. खरे ने नम्रता निर्मलकर के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और अन्य स्वयंसेवकों को भी प्रेरित किया।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जे.के. खलखो ने नम्रता साहू को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह महाविद्यालय और जिले के लिए गर्व की बात है कि हमारी छात्रा ने राज्य स्तरीय मंच पर जिले का प्रतिनिधित्व किया और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।नम्रता निर्मलकर ने इस अवसर पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह शिविर उनके लिए एक अत्यंत शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं को न केवल सामाजिक सेवा का अवसर मिलता है, बल्कि उन्हें विभिन्न संस्कृतियों को समझने और उनके संरक्षण हेतु कार्य करने की प्रेरणा भी मिलती है।इस अवसर पर राज्य स्तरीय पुरस्कृत वरिष्ठ स्वयंसेवक देवेंद्र कुमार साहू, गजेंद्र ढीमर, डिलेश्वर देशमुख, लक्ष कुमार साहू, चंद्रेश यादव, तनुजा साहू, निधि चंद्राकर, बिनीता मांडवी, कल्पना धनकर, जागृति बारले, जागेश्वरी साहू और कंचन साहू सहित महाविद्यालय के अन्य छात्र-छात्राओं ने नम्रता निर्मलकर को उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।