बालोद। बालोद के वार्ड 12 में स्थित आंगनबाड़ी के पालना केंद्र में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वार्ड के नवनिर्वाचित युवा पार्षद सुमित शर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने स्वयं पहले फाइलेरिया की गोली सेवन कर इसके प्रति फैले भ्रांति और अफवाहों को दूर करने का प्रयास करते हुए लोगों को जागरूक किया और कहा कि इसमें किसी तरह का नुकसान नहीं है। इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। देश को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का योगदान जरूरी है । उन्होंने स्वयं दवाई लेने के साथ साथ सभी वार्ड वासियों को दवाई लेने हेतु प्रेरित किया। साथ ही बालोद के सभी नागरिकों से भी अपील किया कि फाइलेरिया की दवाई अवश्य लेवे। इस कार्यक्रम में पूर्व पार्षद छबि सार्वा , स्वास्थ्य विभाग के एमटी सुशीला साहू , मितानिन श्वेता साहू, पालना केंद्र के कार्यकर्ता रूप यादव, वार्ड वासी अमलेश्वरी साहू एवं अन्य वार्डवासी उपस्थित रहे।
फाइलेरिया के लक्षण बताकर पार्षद ने किया वार्ड वासियों को जागरूक
कार्यक्रम के दौरान वार्ड पार्षद
सुमित शर्मा ने वार्ड वासियों को फाइलेरिया के लक्षण सहित विभिन्न जानकारी देकर लोगों को जागरुक भी किया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया की बीमारी आप सबको पता नहीं होगा पर यह एक मादा मच्छर के काटने से होती है। इसके रोकथाम के लिए बूथ के द्वारा लोगो को जागरूक करने की कोशिश कर रहे है।फाइलेरिया को हम हाथी पाव के नाम से जानते है। अगर इसका लक्षण बॉडी में आ जाए तो रिकवर करना मुश्किल होता है । शुरुआत में ही बीमारी को सही किया जा सकता है तथा हम इस दवाइयों को लेते है तो इस बीमारी से बच सकते है। सभी वार्ड वासियों से और बालोद के सभी नागरिकों से उन्होंने अनुरोध किया कि इसकी गोली का सेवन जरूर करें।
इस तरह से फैलता है फाइलेरिया
पार्षद सुमित शर्मा ने कहा कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। इसके फैलने के विभिन्न स्रोत हो सकते हैं। जैसे कहीं पर रुके हुए पानी में मच्छर के पनपना, संक्रमित व्यक्ति को काटकर मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। संक्रमित व्यक्तियों को हाथी पांव व हाइड्रोसिल का खतरा रहता है।
ये हैं इसके रोकथाम और नियंत्रण के लिए है उपाय
उन्होंने बताया कि हर साल फाइलेरिया प्रभाहित क्षेत्र में एमडीए कार्यक्रम के द्वारा फाइलेरिया का रोकथाम की जाती है। जिसके तहत लोगों को जागरूक किया जाता है कि वह मच्छरदानी का प्रयोग करे। अभियान में फाइलेरिया से बचाव की दवाएं खिलाई जाती है और आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। एमडीए की दवा सरकार द्वारा साल में एक बार घर-घर मुफ्त दी जाती है। इसी तरह डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खाना है और एल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खाना है। दवा लेने वाले को स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा खाना जरूरी है। किसी परेशानी की अवस्था में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। मरते हुए परजीवियों के प्रतिक्रिया स्वरूप कभी-कभी सर दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, उल्टी तथा बदन पर चकत्ते एवं खुजली जैसी मामूली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती है। इसलिए इस पर किसी तरह की घबराने की जरूरत नहीं है। इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं है, ना कोई खतरा है। उन्होंने कहा कि फाईलेरिया के लक्षणों की अगर बात करें तो सामान्य कोई लक्षण इसमें विशेष रूप से दिखाई नहीं देते हैं। पैरों और हाथों में सूजन होना यानि हाथी पांव और हाइड्रोसील यानी अंडकोषों का सूजन, बुखार, हाथ पांव एवं जननांग में तथा उसके आसपास दर्द या सूजन होना, यह इनके प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं।
इन्हें नहीं लेनी चाहिए दवा
2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को यह दवाई नहीं खाना चाहिए। सरकार के लक्ष्य को लेकर पार्षद सुमित शर्मा कहा कि 2030 तक फाइलेरिया भगाने का लक्ष्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रखा गया है। इसके लिए सभी की सहभागिता जरूरी है ।
कौन सी गोली कितनी लेनी है सब कुछ है तय
डीईसी यानी डाइईथाइलकार्बामैजिन की गोली जो 100 एमजी की होती है वह अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग तय की आती है। जैसे 2 साल से कम उम्र के बच्चों को तो कोई भी दवा नहीं देनी है। लेकिन 2 से 5 साल के लिए एक गोली 6 से 14 साल के लिए दो गोली, 15 साल तथा उससे बड़े वर्ग के लोगों के लिए तीन गोलियां दी जाती हैं। इसी तरह एल्बेंडाजोल की गोली जो कि प्रत्येक गली 400 एमजी की होती है, इसे 2 से 5 साल के लिए एक गोली, 6 से 14 साल के लिए एक गोली और 15 साल और उसे बड़े वर्ग के लिए एक गोली निर्धारित की गई है।