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बालोद। पूरी तरह से जर्जर हो चुके भवन में पीपरछेड़ी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, कभी-भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई है। मरीज और स्वास्थ्यकर्मियों की जान हमेशा खतरे में रहती है। जर्जर हो चुकी भवन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीपरछेड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल ऐसा है कि जान हमेशा खतरे में बनी रहती है। बात इलाज की नहीं, यहां जर्जर भवन की बात हो रही है। पिपरछेड़ी में चल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इस भवन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है।जान को खतरे में डालकर स्वास्थ्यकर्मी यहां काम करने को मजबूर है। ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं शासन प्रशासन को उक्त जर्जर भवन की स्थिति से अवगत कर समय पर संधारण कार्य अथवा नवीन भवन निर्माण की मांग के पश्चात भी जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जो कभी भी स्वास्थ्य केन्द्र में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी तथा प्रतिदिन आने वाले मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा का लाभ ले रहे है 21 ग्रामों के ग्रामीण
बता दे कि पीपरछेड़ी में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आसपास के 21 ग्रामों के 25 हजार ग्रामीण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा का लाभ लेते हैं। प्रतिमाह डेढ़ से दो हजार ग्रामीण अपनी स्वास्थ्यगत समस्या लेकर यहां आते हैं जिन्हें समुचित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही है। विदित हो कि संस्थागत सर्वाधिक सुरक्षित प्रसव कार्य के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को सम्मानित भी किया जा चुका है लेकिन स्वास्थ्य केन्द्र भवन की जर्जर स्थिति को देख अब आने वाले मरीज भी भयभीत होने लगे हैं।
अस्पताल में बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं होने से शाम ढलते ही असामाजिक तत्व करते है नशा पान
भवन की सुरक्षा के लिए अब तक बाउण्ड्रीवाल का निर्माण भी नहीं किया गया है जिसके चलते शाम ढलते ही असामाजिक तत्व परिसर में बैठकर नशापान करते नजर आते हैं वहीं बाउण्ड्रीवाल नहीं होने के कारण आसानी से मवेशियों का झुंड परिसर में विचरण करते रहते हैं। स्वास्थ्य केन्द्र में आने जाने के लिए अब तक सीसी रोड का निर्माण नहीं हो पाया है जिसके चलते बरसात के दिनों में मरीजों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन तथा शासन से शीघ्र ही उपरोक्त समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।