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एनएच 930 ठेकेदार की लापरवाही के खिलाफ दर्जनों शिकायत के बाद भी प्रशासन मौन…जिला मुख्यालय में ही ठेकेदार की लापरवाही से अब लोग रोज हो रहे परेशान

बालोद। बालोद शहर से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 930 के ठेकेदार की कार्यप्रणाली से आम लोग व बस स्टेंड के व्यपारी हलकान हो गए है। ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण में लगातार लापरवाही सामने आ रही हैं लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जा रही हैं । आखिरकार प्रशासन ठेकेदार पर कार्यवाही करने के लिए क्यों बच रही है।जिस पर प्रशासन के ऊपर सवालिया निशान उठने लगी है।


दरससल एनएच 930 सड़क निर्माण के बाद नया बस स्टेंड के प्रवेश द्वार में नाली का निर्माण कर पुल लगाया गया है जिसमे आधी अधूरी गिट्टी डालकर छोड़ दिया है और एप्रोच रोड को खोदकर छोड़ दिया है लेकिन उसमे सांकेतिक बोर्ड नही लगाया है जिससे यात्रियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नया बस स्टेंड के प्रवेश द्वार स्थित नाली निर्माण कर पुल लगाया गया है। नेशनल हाईवे के ठेकेदार द्वारा उक्त पुल के ऊपर आधी अधूरी गिट्टी डालकर छोड़ दिया है और उक्त पुल के नीचे एप्रोच सड़क को खोदकर छोड़ दिया है उसमे सड़क बंद होने की जानकारी के लिए सांकेतिक बोर्ड नही लगाया है बस स्टेंड से जाने वाले यात्री अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए पुल के पास जाते है तो पता चलता है की एप्रोच सड़क पर गड्ढा होने से निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। सड़क निर्माण करा रहे ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते पिछले एक सप्ताह से नाली निर्माण निर्माण कर पुल लगाया है।पुल के ऊपर गिट्टी डालकर छोड़ दिया जिससे आने जाने वाले यात्रियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

क्या ठेकेदार को विभाग के साथ अब प्रशासन का संरक्षण..?

आपको बतादे NH 930 सड़क निर्माण कार्य जबसे प्रारंभ हुआ है तब से चाहे शहर के व्यापारी संघ राजनीतिक दल हो या ग्रामीण सभी लोग अलग अलग मामलो में ठेकेदार द्वारा कार्य में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कार्य करने तथा निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने का दर्जनों शिकायत जिला प्रशासन के पास कर चुके है यही नहीं मामले में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने खुद विभाग के मंत्री नितिन गडकरी तक शिकायत कर चुके है बावजूद इसके ठेकेदार की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया और निर्माण कार्य में लगातार लापरवाही बरती जा रही है । इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है ठेकेदार के रसूख के आगे अब शासन प्रशासन भी कमजोर नजर आ रहा है। बहरहाल देखना होगा क्या ठेकेदार की मनमानी जारी रहेगी या प्रशासन इस पर लगाम लगा पाएगी।

 

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