ऐसा ही मामला बालोद जिला मुख्यालय से लगे सिवनी में सामने आया। गुरुवार की सुबह 11.25 बजे सहायक संचालक मछली पालन कार्यलय के विभिन्न शाखाओं में अधिकारी कर्मचारी नहीं पहुंचे थे। कार्यलय का कोई भी स्टाफ यहां नहीं पहुंचा था। टेबल और कुर्सी खाली मिला केवल प्यून ही कार्यलय में मिला।माह के दूसरे और तीसरे शनिवार के साथ माह के सभी शनिवारों को छुट्टी देने के पीछे शासन की मंशा है कि इससे कार्यक्षमता और उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी।
लेकिन बालोद जिले के शासकीय विभागों में जो तस्वीरें देखने को मिल रही है उससे तो साफ जाहिर होता है कि शासन द्वारा जारी आदेश के एक को लेकर शासकीय कर्मचारियों में जितनी खुशी है वहीं दूसरे को लेकर वे सजग नजर नहीं आ रहे हैं। बालोद जिले के अधिकतर शासकीय कार्यालयों की स्थिति इतनी चिंतनीय है कि दूर-दराज से आने जाने वाले लोगों को अपने काम के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ता है। ऊपर से शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों की लेटलतीफी आमजन की तकलीफों में सोने का सुहागा का काम करती है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विगत 26 जनवरी को पांच दिन कार्यदिवस की घोषणा की थी। जिसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 फरवरी को आदेश जारी किया था। राज्य के मंत्रालय, विभाग, शासकीय कार्यालयों में शनिवार को भी अवकाश घोषित किया गया है। साथ ही सभी अधिकारियों कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5ः30 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है। मगर अब तक अधिकारी कर्मचारियों के रैवये में सुधार नहीं आया है। वे मनमाने समय में कार्यालय पहुंच रहे हैं।