बालोद- जिला मुख्यालय के पानाबरस डिपो में 22 हैक्टेयर में बनाए गए पर्यावरण पार्क उद्धाटन के पहले ही कबाड़ होकर झाड़ियों में तब्दील हो गया है। प्रर्यावरण पार्क का निर्माण सात साल से अधूरा है, लेकिन यह बिना उपयोग के ही उजड़ गया है। लाखों के झूले, एडवेंचर,ट्रैक निर्माण,वॉच पार्क,वन औषधि प्लांट सहित अन्य सामग्री टूट गई है। वन विभाग ने पर्यावरण पार्क के नाम पर एक करोड़ 29 लाख 75 हजार रुपये खर्च कर डाले है। इस तरह संवरने से पहले पार्क उजड़ गया। वन विभाग ने इन सात वर्षों में सिर्फ एक बड़ा स्वागत द्वार ही बना है। वह भी जर्जर होने की स्थिति में है। पार्क के बारे में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एडवेंचर पार्क पहले बना था जो प्रर्यावरण में तब्दील होने और बायो डायवसिर्टी पार्क में डेवलप करने की बाते कही जा रही हैं।
लाखों रूपए स्वीकृत होने के पश्चात् भी अब तक आमजनता के लिए सुलभ नहीं हो पाया है पर्यावरण पार्क
शासन द्वारा जिला मुख्यालय के राजहरा मार्ग स्थित पानाबरस डिपो के समीप 22 हेक्टेयर वन क्षेत्र को पर्यावरण पार्क के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ों रूपए स्वीकृत करने के 7 वर्षों के पश्चात् भी जिला पर्यावरण पार्क आकार नहीं ले पाया है। बता दे कि शासन द्वारा जिला मुख्यालय में जिला पर्यावरण पार्क निर्माण के लिए सत्र 2016-17 में एक करोड़ 25 लाख 75 हजार रूपए स्वीकृत किया गया था इसके पश्चात् समय-समय पर अन्य नवनिर्माण एवं संधारण कार्य के नाम पर लाखों रूपए स्वीकृत होने के पश्चात् भी अब तक पर्यावरण पार्क आमजनता के लिए सुलभ नहीं हो पाया है।
जिला पर्यावरण पार्क में किसी भी नागरिक का प्रवेश पर लगाया पाबंदी
एक प्रकार से जिला पर्यावरण पार्क वन विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारी के लिए सिर्फ अवैध कमाई का जरिया बन कर रह गया है। वन विभाग के जिम्मेदार अपनी पोल खुल जाने की डर से जिला पर्यावरण पार्क में किसी भी नागरिक के लिए अब तक प्रवेश पर पाबंदी लगाकर रखा है। पर्यावरण पार्क में जाने पर वहां तैनात कर्मचारी पार्क के अंदर कार्य प्रगति पर होने तथा विभाग द्वारा किसी के भी अंदर जाने पर मनाही होने की जानकारी दी जाती है जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विगत् सात वर्षों से पर्यावरण पार्क निर्माण के नाम पर विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।
साफ सफाई नहीं होने के कारण अपना मूल स्वरूप खोने लगा है आक्सीवन क्षेत्र
वन विभाग द्वारा पर्यावरण सुधार के नाम पर जिला मुख्यालय में कुंदरूपारा के समीप वन क्षेत्र में सत्र 2013-14 में ऑक्सीवन क्षेत्र के नाम पर 48 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में सर्वाधिक आक्सीजन देने वाले लगभग 8 हजार मिश्रित प्रजाति के पौधों का रोपण किया गया था। प्रारंभिक समय में आक्सीवन क्षेत्र की नियमित सुरक्षा एवं समय पर पानी प्रदान करने के चलते रोपित पौधे वृक्ष का आकार ले चुके हैं लेकिन वर्तमान कुछ समय से आक्सीवन क्षेत्र की साफ सफाई नहीं होने के कारण आक्सीवन क्षेत्र अपना मूल स्वरूप खोने लगा है वहीं आक्सीवन क्षेत्र की सीमा के समीप ही नगरपालिका प्रशासन द्वारा नगर से प्रतिदिन निकलने वाले प्लास्टिक एवं पॉलिथीन के अपशिष्ट पदार्थों को डंप किया जा रहा है। प्लास्टिक एवं पॉलिथीन को जलाने के नाम पर कचरे के ढेर में आग लगाने के कारण चौबिसों घंटे जहरीली गैस निकल रही है जो आसपास के पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है। अपशिष्ट पदार्थों में लगी आग आक्सीवन क्षेत्र के लिए भी खतरा बन गया है।




















