प्रदेश रूचि

बालोद जिले में अवैध प्लाटिंग में चल रहा बड़ा खेल, अवैध प्लाटिंग कर लूटा जा रहा आम जनता,प्रशासन ने दिए कार्यवाही के संकेत

 

बालोद, बालोद जिला निर्माण के बाद अवैध प्लाटिंग करने वालों की बाढ़ सी आ गई है अब अवैध प्लाटिंग कर लोगों को झूठे सपने दिखा कर लूटा जा रहा है प्रथम द्वषटा में अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ में एफ आई आर दर्ज किए जाने की मांग अब पीड़ित पक्ष करने लगे हैं पीड़ित पक्ष अमलेश्वर कुमार राव ,दुष्यंत साहू, श्याम मरकाम आदि लोगों ने प्रदेशरूचि को अपनी पीड़ा बताया कि बालोद जिले के विभिन्न प्लाट विक्रय करने वाले लोगों ने प्लाट विक्रय करते समय झूठे सपने दिखा कर प्लाट का विक्रय कर दिया और जब उन्हें अधिकार की बात किया तो सुविधा के नाम पर शून्य था अब पीड़ित पक्ष जिला कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारी को शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं,,,

जिला मुख्यालय के ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत कम भाव पर प्लाट बेचने का लुभावना सपना दिखाकर खुलेआम अवैध प्लाटिंग का धंधा चल रहा है। बालोद जिले में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, इसलिए भू-माफिया प्लाट उपलब्ध कराने का लालच देकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। जिन लोगों को ले आउट, डायवर्सन की जानकारी नहीं है, वह रोड पर कच्ची मुरुम की रोड, बाउंड्री से घिरे प्लॉट के झांसे में आकर अपने आशियाने के लिए जमा पूंजी लगा दे रहे हैं।

अवैध प्लाटिंग को रजिस्ट्री का भी प्रश्रय है, जिसके चलते प्लाट काट-काट कर बेचने वाले बेजा कमाई कर रहे हैं। चर्चा है कि प्लाट खरीद कर मकान नक्शा के लिए जब लोग नगर पालिका कार्यालय पहुंचते हैं, तब पता चलता है कि वह अवैध प्लाटिंग के शिकार हो चुके हैं?

 

जिला मुख्यालय व आस-पास के क्षेत्रों अवैध प्लाटिंग का कारोबार बेखौफ हो रहा है। शासन-प्रशासन के सारे नियमों को ताक पर रखकर खेत खलिहान की आवासीय प्लाट के रूप में खरीदी बिक्री हो रही है। हालात यह है कि बालोद शहर के आस-पास इलाकों में रोज कहीं ना कहीं कालोनी का नक्शा खींचा जा रहा है। चर्चा हैं कि इस पूरे अवैध कारोबार में नाम,नाम ने राजस्व विभाग सहित पंजीयक कार्यालय में सांठ-गांठ कर लोगों की जमा पूंजी को चौपट करने में लगे हैं।

नगर पालिका सहित अन्य नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है। भू-माफिया रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारटी (रेरा) को दरकिनार कर प्लाट बेच रहे है। अवैध निर्माण की वजह से शहर का सुनियोजित विकास नहीं हो पा रहा है। तरौद, झलमला, सहित आस-पास के गांव का नक्शा भी बिगड़ रहा है, तो आने वाले दिनों में लोग जहां मूलभूत सुविधाओं को तरसते नजर आयेंगे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, अवैध तरीके से कालोनी बसाने वाले भू-माफियाओं ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं।

अवैध प्लॉटिंग करने वालों को इस बात की जानकारी होती है उनकी जमीन कृषि या कामर्शियल है। उसे आवासीय के रूप में बेचने के लिए डायवर्सन जरूरी है। तहसील दफ्तर में डायवर्सन के लिए रजिस्ट्री के दस्तावेज और आवेदन देकर डायवर्सन हो सकता है। इसका खर्च भी ज्यादा नहीं है। फिर भी, मुनाफा कम न हो, इसलिए खेत में ही प्लाट काटकर बिक्री। नियमों के अनुसार किसी प्लाट के चार भाग करने यानी चार प्लॉट बनाकर बेचने पर टाउन प्लानिंग से लेआउट पास करवाना जरूरी होता है। लेआउट में ही दर्शाया जाता है कि सड़क कहां-कितनी चौड़ी होगी, बिजली खंभे और सीवरेज सिस्टम कैसे बनेगा? इसका खर्च भी बहुत कम है। लेकिन लेआउट पास करवाने के बजाय खुद ही नक्शा बनाकर काट रहे हैं प्लाट।

नए नियमों के साथ अब हर कॉलोनाइजर, बिल्डर या प्लॉटिंग करने वालों को रेरा में पंजीयन करवाना अनिवार्य है। रेरा में जमा कराए गए ब्रोशर के आधार पर ही काम करवाना होता है, लेकिन जमीन के कई खिलाड़ी रेरा में पंजीयन ही नहीं करवाते क्योंकि रजिस्ट्रेशन होते ही रेरा सारे प्रोजेक्ट की निगरानी शुरू कर देता है, हर सुविधा देने में खर्च ज्यादा होगा, इसलिए भू-माफिया पंजीयन नहीं कराते, जिला मुख्यालय सहित आस-पास सटे ग्रामों की अगर मुखिया स्वयं टीम बनाकर जांच करवाये तो, भू-माफियाओं द्वारा खेल जा रहे खेल से पर्दा उठ सकता है।

जहां बगैर लेआउट पास कराए टुकड़ों में जमीन बेची जा रही है। ऐसी कालोनियों में न तो सड़क बनाई जाती है, न ही पानी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती है। अवैध कालोनी बनाने वाले ओपन एरिया भी नहीं छोड़ते हैं। अवैध कालोनाइजर लोगों से वादे करके प्लाट और मकान बेच देते हैं।,,

आधा दर्जन से भी ज्यादा भू-माफिया सक्रिय

बालोद जिला मुख्यालय व आस-पास के क्षेत्रों अवैध प्लाटिंग का कारोबार बेखौफ हो रहा है। शासन-प्रशासन के सारे नियमों को ताक पर रखकर खेत खलिहान की आवासीय प्लाट के रूप में खरीदी बिक्री हो रही है। हालात यह है कि बालोद शहर के आस-पास इलाकों में रोज कहीं ना कहीं कालोनी का नक्शा खींचा जा रहा है। चर्चा हैं कि इस पूरे अवैध कारोबार में राजस्व विभाग सहित पंजीयक कार्यालय में सांठ-गांठ कर लोगों की जमा पूंजी को चौपट करने में लगे हैं।

सुनियोजित विकास के लिए रोड़ा

नगर पालिका सहित अन्य नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है। भू-माफिया रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारटी (रेरा) को दरकिनार कर प्लाट बेच रहे है। अवैध निर्माण की वजह से बालोद शहर का सुनियोजित विकास नहीं हो पा रहा है। बालोद सहित आस-पास के गांव का नक्शा भी बिगड़ रहा है, तो आने वाले दिनों में लोग जहां मूलभूत सुविधाओं को तरसते नजर आयेंगे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, अवैध तरीके से कालोनी बसाने वाले भू-माफियाओं ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं।

नियम जानते हैं, पर डायवर्सन व पंजीयन नहीं

अवैध प्लॉटिंग करने वालों को इस बात की जानकारी होती है उनकी जमीन कृषि या कामर्शियल है। उसे आवासीय के रूप में बेचने के लिए डायवर्सन व विभागीय अनुमति जरूरी है। लेकिन अनुमति के बाद सरकार के नियमों का पालन और खर्च बढ़ जाने के डर से बड़े खसरे का एक हिस्सा परिवर्तित होता है और पूरा खेत को प्लाट बनाकर बेच जाते है

 

कंट्री&टाउन प्लानिंग से लेआउट पास नहीं

नियमों के अनुसार किसी प्लाट के चार भाग करने यानी चार प्लॉट बनाकर बेचने पर टाउन प्लानिंग से लेआउट पास करवाना जरूरी होता है। लेआउट में ही दर्शाया जाता है कि सड़क कहां-कितनी चौड़ी होगी, बिजली खंभे और सीवरेज सिस्टम कैसे बनेगा? इसका खर्च भी बहुत कम है। लेकिन लेआउट पास करवाने के बजाय खुद ही नक्शा बनाकर काट रहे हैं प्लाट,,,

इस संबंध में अनुविभागीय दंडाधिकारी शीतल बंसल कहती हैं कि अवैध प्लाटिंग वालों के खिलाफ में लगातार कार्रवाई जारी हैं अगर कोई भी अवैध रूप से प्लाटिंग करता है और नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

वही इस संबंध में मुख्य नगरपालिका अधिकारी रोहित साहू बताते हैं कि प्लाटिंग नक्शा खसरा के लिए राजस्व विभाग से ही अनुमति लेना होता है मकान निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर पालिका संपूर्ण दस्तावेज सूक्ष्म रूप से जांच करने के बाद ही जारी करती है अवैध रूप से अगर कोई अवैध प्लाटिंग कर रहा है तो उनके खिलाफ में कड़ी कार्रवाई किया जाना चाहिए।

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