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सुरडोंगर में ग्रामीण के मकान तोड़ने के मामले में आंदोलन हुई तेज..समर्थन में मोची समाज व आदिवासी समाज आये सामने..डौंडी थाना प्रभारी पर एकतरफा कार्यवाही का लगा आरोप

बालोद-जिले के डोंडी थाना क्षेत्र के गांव वालों द्वारा आशियाना तोड़े जाने के बाद बेघर हुए सुरडोंगर के गणेशराम बघेल शनिवार दोपहर से शाम तक न्याय की मांग को लेकर डौंडी थाने में परिवार सहित धरना पर बैठे रहे। उनके समर्थन में मोची समाज तथा आदिवासी समाज के लोग भी थाना पहुंचे थे। मोची समाज द्वारा मंगलवार से आंदोलन तेज करने की बात कही है। गणेश राम का कहना है कि उनके घर को तोड़ने वाले सरपंच, उपसरपंच, ग्राम विकास समिति के लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक वह इसी जगह पर बैठे रहेंगे।

गांव वालो ने मेरा धर तोड़ा और मेरा परिवार को बेधर किया इसके बाद पुलिस ने मेरे ऊपर बनाया काउंटर केस

उन्होंने बताया कि मेरे साथ घटित घटना को करीब एक महीना होने को है और पुलिस और प्रशासन द्वारा उनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है। गांव वालों ने मेरा घर तोड़ा और मेरे परिवार को बेघर कर दिया और उल्टे मेरे उपर ही काउंटर केस बनाया गया है। अपने पत्नी रुकमणी बाई तीनों बच्चों और ससुर दसरूराम, काका ससुर चैतूराम के साथ गांव से पैदल आए हैं और यहां डौंडी थाने में दोपहर 12 बजे से धरना प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। शाम तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

प्रशासन ने आज तक नही की कोई कार्रवाई

गणेश ने कहा कि उनका परिवार कई दिनों तक ठंड के दिन में पेड़ के नीचे रात गुजारे हैं। गणेश राम के समर्थन में आए मोची समाज के ब्लॉक अध्यक्ष जीवधन जगनायक ने कहा कि गरीब का घर तोड़ने वाले सरपंच सत्ता पक्ष का व्यक्ति होने की वजह से उन्हें प्रशासन का संरक्षण है। मंगलवार से उनके समाज द्वारा आंदोलन किया जाएगा।आदिवासी समाज के रेवा रावटे और सुनहरे कोसमा ने कहा कि पिछले दिनों पिछले दिनो यात्री बस की डिक्की में डाल कर बकरा ले जा रहे व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई कर तत्काल उन्हें जेल में डाल दिया। परंतु घटना को अंजाम देने वाले लोगों के ऊपर प्रशासन ने आज तक कार्रवाई नहीं की।कार्रवाई करने का अधिकार डीएसपी स्तर के अधिकारियों को है: डौंडी थाना प्रभारी अनिल ठाकुर ने कहा कि गणेशराम द्वारा 23 फरवरी को जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। एसीएसटी वाले मामले में कार्रवाई करने का अधिकार डीएसपी स्तर के अधिकारियों को होता है। सभी आवश्यक दस्तावेज को उच्च अधिकारियों को सौंप दिए हैं।

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