लेकिन आप छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले नेता है, आप ने सभी समाज को बराबर सम्मान दिया है। इस लिए हमारी जाति नाई के लिए (नाऊ) शब्द का प्रयोग भविष्य में ना होने से आप के प्रशंसको को खुशी होगी, और समाज के सभी हितैसियों को गौरव की अनुभूति होगी। हमें यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि दबे कुचले नाई समाज को पहले बहुत तिरस्कार सहना पड़ा है। सम्मान पूर्वक सेन भाई या नाई कभी नहीं कहा गया, प्रायः नाऊ बोलकर हमेशा उपहास ही किया गया। शासकिय दस्तावेज में जाति नाई है नाऊ जाति नहीं। आप ग्रामीण पृष्टभूमि से भलीभांति परिचित विवेकवान राजनितिज्ञ है, प्रदेश के मुखिया से यह सम्बोधन सुन कर नाई समाज निराश है। हम सभी जन प्रतिनिधियों और हर समाज के भाईयों से विनती करते है कि नाई जाति के लोगो को नाऊ ना कहे, नाई समाज का सरोकार हर समाज से होता है। नाई समाज हर समाज का सम्मान करता है, और यही अपेक्षा आप सभी से करता है।
भगवान श्रीहरि के बाद हमारी जानकारी में तीन समाज को ठाकुर कहलानें का सम्मान प्राप्त है, जिसमें एक नाई समाज है। राजपुत समाज को ठाकुर कहलाने का सम्मान प्राप्त है क्योंकि राजपुत मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपनी शिर कटाने से नहीं हिचकते। एक ठाकुर आदिवासी गोंड़ समाज के भाई होते हैं, ये प्रकृति के उपासक होते हैं, प्रकृति की सेवा करते है पूजा करते है। एक नाई समाज ठाकुर कहलाता है क्योंकि नाई, समाज के सेवक होते हैं, सुख-दुख के हर कार्य में अपनी भागीदारी निभाता है।इस दौरान उपाध्यक्ष संतोष श्रीवास,सचिव जितेंद्र श्रीवास,कोषाध्यक्ष झगगर सिंह कौशिक,सहसचिव मोहनलाल भारद्वाज,विक्की भारद्वाज सहित बड़ी सख्या में सेन समाज के लोग शामिल थे।