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पानी की मांग से शुरू हुआ आंदोलन, पुलिसिया कार्रवाई और सामाजिक अस्मिता तक पहुंचा मामला; प्रशासन के आश्वासन पर देर शाम शांत हुए ग्रामीण

200 से अधिक ग्रामीणों को पुलिस ने किया था डिटेन, परिजनों की रिहाई और पेयजल की मांग को लेकर बच्चे भी पहुंचे थाने; वाटर टैंकर और आयरन रिमूवल प्लांट लगाने पर बनी सहमति

बालोद/दल्लीराजहरा। जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी के ग्राम आड़ेझर में पेयजल संकट को लेकर पिछले कई दिनों से जारी ग्रामीणों का आंदोलन शनिवार देर शाम प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। गांव में पानी की समस्या दूर करने और बोईरडीह डेम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते पुलिसिया कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार के विवाद तक पहुंच गया। हालात ऐसे बने कि चक्काजाम कर रहे 200 से अधिक ग्रामीणों को पुलिस ने डिटेन कर लिया, वहीं अपने परिजनों की रिहाई और पानी की मांग को लेकर गांव के बच्चे भी जंगल के रास्ते दल्लीराजहरा थाने पहुंच गए। दिनभर चले घटनाक्रम के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच पेयजल व्यवस्था को लेकर सहमति बनी, जिसके बाद सभी ग्रामीणों को बिना शर्त रिहा कर दिया गया।

तीन दिनों से पेयजल की मांग पर अड़े थे ग्रामीण

ग्राम आड़ेझर में बोर से पानी नहीं आने के कारण ग्रामीणों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया था। समस्या के स्थायी समाधान और बोईरडीह डेम से पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू किया। ग्रामीणों ने महामाया मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। इस दौरान स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन पेयजल संकट का समाधान नहीं निकलने के कारण ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।

200 से अधिक ग्रामीण डिटेन, ओपन थिएटर में रखा

शनिवार को पुलिस ने चक्काजाम स्थल से 200 से अधिक ग्रामीणों को हिरासत में लेकर दल्लीराजहरा के ओपन थिएटर में रखा। ग्रामीणों को अलग-अलग स्थानों पर डिटेन किए जाने की सूचना गांव तक पहुंची तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक, अपने परिजनों की रिहाई और गांव में पानी की व्यवस्था की मांग को लेकर बच्चे भी जंगल के रास्ते दल्लीराजहरा थाने पहुंच गए। बच्चों ने वहां प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने परिजनों को रिहा करने और पेयजल संकट दूर करने की मांग उठाई। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

पुलिसकर्मी के कथित दुर्व्यवहार से बढ़ा विवाद

पेयजल की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन उस समय नया मोड़ ले गया, जब आंदोलन के दौरान आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष के साथ एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप सामने आया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों ने संबंधित पुलिस अधिकारी से माफी मांगने की मांग उठाई। देखते ही देखते पेयजल की समस्या के साथ सामाजिक सम्मान और पुलिस के कथित व्यवहार का मुद्दा भी आंदोलन का हिस्सा बन गया।

वाटर टैंकर और आयरन रिमूवल प्लांट लगाने पर सहमति

मामले को शांत कराने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चर्चा हुई। बैठक में गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, पेयजल आपूर्ति के लिए एक वाटर टैंकर देने और पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में आयरन रिमूवल प्लांट लगाने पर सहमति बनी। प्रशासन की ओर से मांगों पर आश्वासन दिए जाने के बाद डिटेन किए गए सभी ग्रामीणों को बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया गया।

हालांकि, ग्रामीणों की नाराजगी केवल पेयजल संकट तक सीमित नहीं रही। पुलिसकर्मी के कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। मामले में आगे जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद देर शाम स्थिति शांत हुई।

अब आश्वासनों पर अमल की चुनौती

आड़ेझर में आंदोलन समाप्त होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल गांव में पेयजल संकट के स्थायी समाधान का है। ग्रामीण लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और बोईरडीह डेम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में वाटर टैंकर की व्यवस्था और आयरन रिमूवल प्लांट लगाने को लेकर प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासनों पर अमल महत्वपूर्ण होगा। वहीं, पुलिसकर्मी के कथित दुर्व्यवहार के मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर भी ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी रहेंगी।

फिलहाल, पानी की मांग से शुरू हुआ आंदोलन प्रशासन के आश्वासन पर समाप्त हो गया है, लेकिन ग्रामीणों को राहत तभी मिलेगी, जब गांव में नियमित और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था धरातल पर नजर आएगी।

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