बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालोद में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए लगाए गए वाटर कूलर में सैकड़ों की संख्या में मरे हुए कीड़े पाए जाने का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस मामले को युवा नेता देवेंद्र साहू ने प्रमुखता से उठाते हुए महाविद्यालय में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि महाविद्यालय में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। कभी पानी से दुर्गंध आने, कभी पेयजल में कीड़े पाए जाने तो कभी पानी की टंकी के आसपास सांप दिखाई देने की शिकायतों ने विद्यार्थियों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा मामला वाटर कूलर में बड़ी संख्या में मरे हुए कीड़े पाए जाने का है, जिसने महाविद्यालय में पेयजल व्यवस्था की नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पेयजल व्यवस्था पर सवाल, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की चिंता
महाविद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में उपलब्ध पेयजल का स्वच्छ और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों की प्यास बुझाने के लिए लगाए गए वाटर कूलर में यदि मरे हुए कीड़े पाए जाते हैं, तो यह केवल साफ-सफाई का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंता भी है।
शिकायतों के बावजूद यदि पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, तो विद्यार्थियों को मजबूरी में असुरक्षित पानी पीने या बाहर से पानी की व्यवस्था करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि महाविद्यालय प्रशासन पेयजल स्रोतों, वाटर कूलर और पानी की टंकियों की तत्काल जांच कराए तथा नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
युवा नेता देवेंद्र साहू ने उठाया मुद्दा
महाविद्यालय में विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिलने की समस्या को युवा नेता देवेंद्र साहू ने उठाया है। उन्होंने इस मुद्दे के माध्यम से विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और पेयजल व्यवस्था की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखा। विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पानी की स्वच्छता सुनिश्चित करना महाविद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि किसी भी विद्यार्थी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका न रहे।इस दौरान रामावतार साहू, राहुल निषाद, टमेश कुमार, पीलेश्वर साहू, जागेश्वर कुमार सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।

नियमित सफाई और पेयजल की जांच जरूरी
महाविद्यालय परिसर में पेयजल को लेकर सामने आई शिकायतों के मद्देनजर वाटर कूलर और पानी की टंकियों की तत्काल सफाई, पेयजल की गुणवत्ता की जांच तथा नियमित रखरखाव की व्यवस्था आवश्यक है। साथ ही, टंकियों को सुरक्षित ढंग से ढंकने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब देखने वाली बात होगी कि महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है। विद्यार्थियों की सेहत से जुड़े इस मामले में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। आखिरकार, शिक्षा के मंदिर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना किसी भी संस्थान की बुनियादी जिम्मेदारी है।













