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गांधी जयंती पर वनमंडल में स्वच्छता और हरियाली का संदेश, वन्यप्राणी सप्ताह भी शुरू

दशहरा तालाब से बोईरडीही डैम तक चला स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण और वन संरक्षण का दिया संदेश

बालोद, । गांधी जयंती के अवसर पर वनमंडल बालोद में स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्ति जागरूकता और वृक्षारोपण को लेकर व्यापक अभियान चलाया गया। सेवा संकल्प अभियान के घटक “सेवा मेरा योगदान” के तहत जिले के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसी के साथ वनमंडल में वन्यप्राणी सप्ताह का भी शुभारंभ हुआ।

दशहरा तालाब में सफाई के साथ पौधरोपण

बालोद वन परिक्षेत्र में दशहरा तालाब परिसर में स्वच्छता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, पार्षद पुष्पा साहू, पार्षद कांती साहू, स्वच्छता दीदियों, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तालाब परिसर की साफ-सफाई की। इसके बाद परिसर में पौधे लगाए गए।

वहीं पर्यावरण पार्क, बालोद में वनमंडलाधिकारी की उपस्थिति में वन विभाग के कर्मचारियों ने वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम के दौरान अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने पर जोर दिया गया।

बोईरडीही डैम के आसपास हटाया कचरा

दल्लीराजहरा वन परिक्षेत्र में वन कर्मचारियों और वन प्रबंधन समिति कोटागांव के सदस्यों ने बोईरडीही डैम के किनारे और आसपास स्वच्छता अभियान चलाया। क्षेत्र में फैले प्लास्टिक, कचरे और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र कर उनका निस्तारण किया गया।

वन क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास बढ़ते प्लास्टिक कचरे को पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए लोगों को स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया।

डौंडी में प्लास्टिक मुक्ति का संदेश

डौंडी वन परिक्षेत्र में भी गांधी जयंती पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। सुबह 8 बजे महामाया मंदिर परिसर में प्लास्टिक मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसके बाद सुबह 10 बजे वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में साफ-सफाई अभियान चलाकर वृक्षारोपण किया गया।

वन्यप्राणी संरक्षण को प्लास्टिक प्रबंधन से जोड़ा

गांधी जयंती से शुरू हुआ वन्यप्राणी सप्ताह इस बार स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के संदेश से जुड़ा है। वन क्षेत्रों और जलस्रोतों में फेंका जाने वाला प्लास्टिक एवं अन्य कचरा वन्यप्राणियों के लिए खतरा बनने के साथ उनके प्राकृतिक आवास को भी प्रभावित करता है। ऐसे में वन्यप्राणी संरक्षण के साथ स्वच्छ पर्यावरण को जोड़ते हुए सप्ताह की शुरुआत स्वच्छता अभियान से की गई।

 

वन्यप्राणी सप्ताह के दौरान बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को वन्यप्राणियों, जंगलों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

 

गांधी जयंती पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने स्वच्छता, हरियाली और वन्यप्राणी संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि प्रकृति की सुरक्षा केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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