‘हर बूंद सहेजने’ की मुहिम ने दिलाई देश में पहचान, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
बालोद। बारिश की हर बूंद को सहेजने, भू-जल स्तर को मजबूत करने और जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनअभियान बनाने की दिशा में बालोद जिले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान कायम की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) 3.0 अभियान में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है, वहीं राज्य के पांच जिलों को देश के शीर्ष-10 जिलों में स्थान मिला है। इनमें बालोद जिला लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर के टॉप-10 जिलों में शामिल हुआ है।
बालोद की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह केवल जल संरचनाओं के निर्माण अथवा आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में जल संरक्षण को लेकर तैयार किए गए सामुदायिक सहभागिता के मॉडल और गांव-गांव तक पहुंची जागरूकता का परिणाम है। जिला प्रशासन के नेतृत्व में जल संरक्षण के कार्यों को ग्रामीणों, किसानों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग के रूप में सामने आया है।

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में बनी जनभागीदारी की मजबूत जमीन
बालोद जिले के इस लगातार बेहतर प्रदर्शन के पीछे जिला प्रशासन की योजनाबद्ध कार्यप्रणाली और मैदानी स्तर पर निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जल संरक्षण को महज सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि गांव और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
जिले में जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाते हुए ग्रामीणों को इन गतिविधियों से जोड़ा गया। प्रशासन की ओर से जल संरक्षण संरचनाओं की प्रगति, उनकी उपयोगिता तथा जमीनी स्थिति पर लगातार ध्यान दिया गया। इसके साथ ही पंचायतों और ग्रामीणों के बीच यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया कि बारिश का पानी बहकर बाहर जाने देने के बजाय उसे गांव और खेत में ही रोकना भविष्य की जल सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदम है।
कलेक्टर के नेतृत्व में प्रशासनिक अमले द्वारा विभागों के बीच समन्वय और मैदानी स्तर पर कार्यों की निगरानी पर जोर दिए जाने से जल संरक्षण अभियान को गति मिली। इसका परिणाम यह रहा कि सरकारी प्रयासों के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी लगातार बढ़ी।

लगातार दूसरी बार टॉप-10 में बालोद
जल संचय जन भागीदारी अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। पहले दो चरणों में राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
इसी अभियान में बालोद ने भी लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। लगातार दूसरी बार देश के शीर्ष-10 जिलों में शामिल होना यह बताता है कि जिले में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयास केवल एक अभियान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें निरंतरता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
बालोद के साथ छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले भी देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं।
आंकड़ों से आगे बढ़कर जनसहभागिता बना बालोद का मॉडल
बालोद की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि जल संरक्षण के कार्यों को केवल प्रशासनिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा गया। गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लोगों को जल संरक्षण की मुहिम से जोड़ने का प्रयास किया गया।
ग्राम पंचायतों की भूमिका बढ़ाने, ग्रामीणों को जल संचयन के महत्व से अवगत कराने तथा उपलब्ध जल संरचनाओं के संरक्षण और उपयोगिता पर ध्यान देने से अभियान को व्यापक आधार मिला।
जल सखी, जल मित्र, पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों और ग्रामीण समुदाय की सहभागिता ने प्रशासनिक प्रयासों को जनआंदोलन का स्वरूप देने में मदद की। यही सामूहिक प्रयास बालोद को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल कराने की बड़ी वजह बना है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ की सोच पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जमीन पर उतारने की दिशा में प्रयास किए गए। खेतों और गांवों में वर्षा जल को अधिक से अधिक रोकने, जल संरचनाओं के माध्यम से उसका संचयन करने तथा भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने पर जोर रहा।
बारिश के पानी को गांव की सीमा से बाहर बह जाने से रोकना और उसे स्थानीय स्तर पर संरक्षित करना आने वाले वर्षों में बालोद की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बेहतर होने के साथ ही किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धि, बालोद की भी मजबूत भागीदारी
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
इसी राष्ट्रीय उपलब्धि में बालोद का लगातार दूसरी बार टॉप-10 में स्थान बनाना जिले के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि बताती है कि जब प्रशासनिक प्रयासों के साथ ग्रामीणों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे चुनौतीपूर्ण विषय पर भी स्थायी और प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

बालोद के लिए उपलब्धि के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी
लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बाद अब बालोद के सामने इस प्रदर्शन को बनाए रखने और जल संरक्षण के कार्यों को और प्रभावी बनाने की चुनौती भी है। जल संरचनाओं के निर्माण के साथ उनका संरक्षण, नियमित उपयोग, भू-जल पुनर्भरण की वास्तविक स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में हो रहे बदलावों पर निरंतर निगरानी जरूरी होगी।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा जनसहभागिता को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाई जा रही यह मुहिम बालोद को आने वाले समय में जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी का एक प्रभावी जिला मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।













