हजारों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। रथ यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक अनुशासन, आस्था और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

नगर पालिका अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने की पूजा-अर्चना
बहुदा रथ यात्रा के शुभ अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा संतोष चौधरी एवं उपाध्यक्ष कमलेश सोनी ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं नगरवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। दोनों जनप्रतिनिधियों ने रथ यात्रा में शामिल होकर श्रद्धालुओं का अभिवादन किया तथा इस पावन परंपरा को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
भक्ति, संगीत और संकीर्तन से गूंजा पूरा नगर
रथ यात्रा के दौरान गाजे-बाजे, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन ने पूरे नगर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हुए। मार्गभर श्रद्धालुओं ने भगवान पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया तथा दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

बहुदा यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में भगवान श्री जगन्नाथ की बहुदा यात्रा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दिन अपने मौसी घर पधारते हैं और नौ दिन बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से पुनः अपने धाम लौटते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस पावन यात्रा में सहभागी बनने तथा भगवान के दर्शन करने से भक्तों को सुख, सौभाग्य, आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष इस यात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
भक्तिभाव और अनुशासन का रहा अद्भुत संगम
पूरे आयोजन में मंदिर समिति के पदाधिकारी, सेवकगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता रही। यात्रा का संचालन धार्मिक गरिमा और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। भगवान श्री जगन्नाथ की बहुदा रथ यात्रा ने एक बार फिर बालोद की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस आयोजन ने नगरवासियों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।




















