लोकेंद्र साहू ने 14 सितंबर को सूर्यकुमार यादव के जन्मदिन के अवसर पर उनसे मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्रिकेटर की करीब 4 क्विंटल वजनी सीमेंट से निर्मित आदमकद प्रतिमा भी उन्हें भेंट की। यह प्रतिमा बालोद से मालवाहक वाहन के जरिए मुंबई के चेंबूर स्थित सूर्यकुमार यादव के निवास तक पहुंचाई गई थी। प्रतिमा देखकर सूर्यकुमार यादव प्रसन्न हुए।

मुलाकात के फोटो और वीडियो सूर्यकुमार यादव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्ट लगातार वायरल हो रही है। इस मुलाकात के जरिए देवगहन गांव में स्थापित शहीद प्रतिमाओं की पहल भी लोगों के बीच चर्चा में आई है।
10 लाख रुपये खर्च कर स्थापित कराईं 18 प्रतिमाएं
लोकेंद्र साहू ने करीब दो वर्ष पहले अपनी निजी राशि से लगभग 10 लाख रुपये खर्च कर गांव में सड़क किनारे स्थित अपने खेत के पास 18 शहीद जवानों की प्रतिमाएं स्थापित करवाई थीं। इनमें कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, पुलवामा हमला, छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों और गलवान घाटी में शहीद हुए सेना एवं पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि दी गई है।
लोकेंद्र साहू के अनुसार, इन प्रतिमाओं को स्थापित करने का उद्देश्य शहीदों को सम्मान देने के साथ ही युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है।

क्रिकेट से रहा है पुराना जुड़ाव
लोकेंद्र साहू स्वयं भी क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके हैं। करीब 25 वर्ष पहले भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने का सपना लेकर वे क्रिकेट की कोचिंग लेने मुंबई गए थे। वर्तमान में वे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
शहीद प्रतिमाओं के अनावरण के लिए किसी भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी को आमंत्रित करने की इच्छा को लेकर वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वे शहीद परिवारों के साथ कई बार मुंबई का दौरा भी कर चुके हैं। जून 2024 में छत्तीसगढ़ के शहीद परिवारों के साथ मिलकर उन्होंने भारत रत्न सचिन तेंदुलकर से मुलाकात का प्रयास भी किया था।
छत्तीसगढ़ आने का दिया आश्वासन
लोकेंद्र साहू के मुताबिक, सूर्यकुमार यादव ने भविष्य में जल्द ही छत्तीसगढ़ आकर देवगहन में स्थापित शहीद जवानों की प्रतिमाएं देखने और शहीद परिवारों से मुलाकात करने का आश्वासन दिया है। सूर्यकुमार यादव की आदमकद प्रतिमा का निर्माण बालोद जिले के मूर्तिकार नरेंद्र देवांगन और मध्यप्रदेश के अमरकंटक निवासी जयपाल ठाकुर ने किया है।













