बैठक की शुरुआत ईष्ट देव की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद बालोद जिले के जामडीपाठ क्षेत्र में आदिवासी समाज के पारंपरिक पूजा स्थल की भूमि पर कथित अवैध कब्जे, संरक्षित वन क्षेत्र में निर्माण और लंबित शासकीय कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। महासंघ ने राज्य में बाहरी व्यक्तियों को भूमि बिक्री पर रोक लगाने की मांग दोहराते हुए गाड़ा समाज के लिए बाजा बोर्ड, अघरिया पाल समाज के लिए भेड़ एवं ऊन संवर्धन बोर्ड, कलार समाज के लिए महुआ बोर्ड तथा शाकंभरी बोर्ड के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई।

बैठक को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि विनोद नागवंशी ने तुयेगोंदी क्षेत्र में आदिवासियों के सदियों पुराने आस्था स्थल जाम्हा बाबा और कैना पर कथित अतिक्रमण तथा संरक्षित वन क्षेत्र में हुए निर्माण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई अब तक अपेक्षित स्तर पर नहीं हुई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार को गंभीर और ठोस पहल करनी चाहिए। उनका आरोप था कि शासन आज भी आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक आस्थाओं को समझने का प्रयास नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि कानून होने के बावजूद तुयेगोंदी में कथित अवैध निर्माण और वन भूमि पर कब्जे के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है।
पूर्व सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि समाज को संगठित होकर अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी। वहीं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकबर राम कोर्राम ने आरोप लगाया कि बस्तर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और बाहरी लोगों द्वारा अवैध कब्जे की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि तुयेगोंदी क्षेत्र को अब तक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) नहीं दिया जाना भी गंभीर चिंता का विषय है।
बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखते हुए तुयेगोंदी प्रकरण में आदिवासी समाज को समर्थन देने की बात कही। प्रदेश अध्यक्ष युवराज सिन्हा ने क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के अध्यक्ष रमेश यदु ने किया। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व सांसद नंदकुमार साय, पूर्व आईजी अकबर राम कोर्राम सहित विभिन्न समाजों के प्रदेश पदाधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।




















