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जामड़ी पाटेश्वर धाम में शांतिपूर्ण संपन्न हुई ऐतिहासिक देव जातरा, हजारों श्रद्धालु पहुंचे; मधुमक्खियों का हमला, मीडिया को 6 किमी पहले रोका गया

बालोद। जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम तुएगोंदी स्थित पवित्र जामड़ी पाटेश्वर धाम में शनिवार को सर्व आदिवासी समाज की पारंपरिक एवं ऐतिहासिक देव जम्हापाट बाबा संरक्षण करसाड़ यात्रा (देव जातरा) धार्मिक श्रद्धा, उत्साह और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुई। हाल के दिनों में पाटेश्वर धाम की वन भूमि और कथित अतिक्रमण को लेकर बने विवाद के कारण इस बार का आयोजन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था। हालांकि आदिवासी समाज, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

बालोद सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदर और अपने आराध्य आंगा देव के साथ पाटेश्वर धाम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने करीब चार किलोमीटर लंबे दुर्गम जंगल और पहाड़ी मार्ग को पार कर पहाड़ी पर स्थित पाट बाबा तथा जलकैना में दर्शन-पूजन किया। परंपरा के अनुसार समाज के लोगों ने पूजा-अर्चना, जीव सेवा एवं सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर जल, जंगल और जमीन की रक्षा, समाज की सुख-समृद्धि तथा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

जंगल में मधुमक्खियों के हमले से मची अफरा-तफरी

देवस्थल की ओर जंगल के रास्ते बढ़ रहे श्रद्धालुओं के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने कुछ ग्रामीणों पर हमला कर दिया। हमले के बाद कई श्रद्धालु जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। घटना में कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई और धार्मिक अनुष्ठान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहा।

विवाद की पृष्ठभूमि और प्रशासन की कार्रवाई

पिछले कुछ समय से जामड़ी पाटेश्वर धाम को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी। सर्व आदिवासी समाज ने संत बालक दास पर लगभग 12 एकड़ वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण कराने का आरोप लगाया था। समाज की मांग थी कि जलकैना क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर पारंपरिक देवस्थल की मूल स्थिति बहाल की जाए। इसी मांग को लेकर समाज ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन भी किया था।

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में भारी पुलिस बल और छह जेसीबी मशीनों की सहायता से जलकैना क्षेत्र से लगी बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई की। इसके बाद मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच देव जातरा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर सहमति बनी।

तीन हजार से अधिक पुलिस जवान रहे तैनात

संवेदनशील आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए। आयोजन स्थल, पहाड़ी मार्ग, प्रवेश द्वार और संवेदनशील क्षेत्रों में करीब तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारी एवं जवान तैनात रहे। पुलिस, प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी पूरे समय हालात पर नजर बनाए रहे। सुरक्षा व्यवस्था के चलते पूरे आयोजन के दौरान किसी प्रकार की बड़ी अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित नहीं हुई।

मीडिया को छह किलोमीटर पहले रोका, पत्रकारों में नाराजगी

सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर प्रशासन ने मीडिया की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया। कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों को बड़ेजुंगेरा क्षेत्र से करीब छह किलोमीटर पहले ही पुलिस ने रोक दिया और उन्हें जामड़ी पाटेश्वर धाम तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसे लेकर पत्रकारों में नाराजगी देखने को मिली। मीडियाकर्मियों का कहना था कि समाचार संकलन के लिए देव स्थल तक पहुंचना आवश्यक था, लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया। पत्रकारों ने इसे मीडिया के कार्य में अनावश्यक बाधा बताते हुए प्रशासन के निर्णय पर सवाल उठाए।

समाज ने शांतिपूर्ण आयोजन को बताया अपनी परंपरा की जीत

आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि देव जातरा सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा है, जिसका उद्देश्य केवल अपने आराध्य देवों की पूजा-अर्चना, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और समाज की खुशहाली की कामना करना है। विवाद और संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ यह आयोजन समाज की एकता और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी का उदाहरण बनकर सामने आया।

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