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जानलेवा लापरवाही! सीलबंद शराब की बोतल में मिले कांच केटुकड़े

बालोद। जिले में शराब की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय बालोद स्थित तांदुला डेम किनारे संचालित देशी शराब दुकान से खरीदे गए सीलबंद शराब के पौवा में कांच के टुकड़े मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना ने न केवल शराब उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, एक शराब उपभोक्ता ने दो दिन पहले तांदुला डेम के समीप स्थित देशी शराब दुकान से “रोमियो” ब्रांड का देशी शराब का पौवा खरीदा था। शराब का सेवन करने से पहले उसने बोतल का निरीक्षण किया, जिसमें उसे शराब के भीतर कांच के कई छोटे-छोटे टुकड़े दिखाई दिए। विशेष बात यह रही कि बोतल पूरी तरह सीलबंद थी और उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ के निशान नहीं थे।

यदि उपभोक्ता बिना जांच किए शराब का सेवन कर लेता तो उसके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। विशेषज्ञों के अनुसार कांच के टुकड़ों का शरीर के भीतर पहुंचना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में यह मामला सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर शराब की बोतल में कांच के टुकड़े कैसे पहुंचे। चूंकि बोतल सीलबंद थी, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि उत्पादन इकाई में पैकिंग के दौरान लापरवाही हुई हो या फिर आपूर्ति श्रृंखला के किसी चरण में गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी की गई हो।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला आबकारी अधिकारी योगेश्वर कुमार द्विवेदी ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जाएगा कि समस्या वेयरहाउस स्तर पर हुई है या सप्लायर द्वारा डिफेक्टिव माल की आपूर्ति की गई है। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित ब्रांड अथवा सप्लाई पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं सीमित संख्या में दोषपूर्ण बोतलें मिलने पर सप्लायर से उसकी प्रतिपूर्ति कराई जाएगी।

इधर, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने इस घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए सरकार और आबकारी विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शराब के पौवा में कांच के टुकड़े मिलना आम लोगों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी शराब का सेवन कर ले तो उसकी जान तक जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर गंभीर नहीं है और अधिकारियों को शराब बिक्री से पहले उसकी नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस घटना के सामने आने के बाद जिले के शराब उपभोक्ताओं में भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि सरकार और विभाग को शराब की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

फिलहाल आबकारी विभाग द्वारा जांच की बात कही गई है, लेकिन अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में वास्तविक जिम्मेदार कौन निकलता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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